बैंक लॉकर का इस्तेमाल साल में एक-दो बार से ज्यादा नहीं होता है। इसलिए कई बार कस्टमर्स इसकी फीस चुकाना भूल जाते हैं। दिक्कत तब होती है, जब फीस का पेमेंट किसी पुराने अकाउंट से लिंक्ड होता है, जो अब एक्टिव नहीं रह गया है। सवाल है कि लॉकर की फीस बैंक को नहीं पेमेंट करने पर क्या होगा?
एक बार पेमेंट मिस करने पर ज्यादा समस्या नहीं
आम तौर पर अगर ग्राहक एक पेमेंट मिस कर जाता है तो इससे तुरंत कोई समस्या नहीं आती है। लेकिन, लंबे समय तक फीस नहीं चुकाने पर बैंक लॉकर के एक्सेस को लिमिट कर सकता है। वह दूसरे तरह से भी एक्शन ले सकता है। लेकिन, ऐसा करने से पहले बैंक ग्राहक को फीस चुकाने का पूरा मौका देते हैं।
बकाया पेमेंट करने के लिए बैंक अतिरिक्त समय देता है
बैंक पहले लॉकर का रेंट चुकाने के लिए ग्राहक को अतिरिक्त समय देते हैं। उसके बाद भी पेमेंट नहीं आने पर बैंक लेट फीस लगाते हैं। हालांकि, यह ध्यान में रखना जरूरी है कि बैंक तुरंत लॉकर को कैंसिल नहीं करते हैं। ग्राहक के रेंट नहीं चुकाने पर रेंट और रेंट पर पेनाल्टी बढ़ती जाती है।
ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारियां बदलने से आती है दिक्कत
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई बार ग्राहक का मोबाइल नंबर, पता या ईमेल आईडी बदलने पर इस तरह की दिक्कत आती है। एक निश्चित समय तक रेंट का पेमेंट नहीं आने पर बैंक ग्राहक को लॉकर ऑपरेट करने से रोक सकता है। इसका मतलब यह है कि जब तक बकाया रेंट और पेनाल्टी का पेमेंट नहीं कर दिया जाता है ग्राहक अपने लॉकर को एक्सेस नहीं कर सकता।
ज्यादातर ग्राहक जानबूझकर पेमेंट मिस नहीं करते
ऐसे ग्राहकों के साथ इस तरह की समस्या ज्यादा आती है, जो लॉकर का बहुत कम इस्तेमाल करते हैं। ऐसे ग्राहक जब लॉकर ऑपरेट करने बैंक जाते हैं तो उन्हें पता चलता है कि उनका लॉकर रेंट काफी समय से बकाया है और इसे चुकाने के बाद ही वे लॉकर का इस्तेमाल कर सकेंगे। ज्यादातर मामलों में ग्राहक जानबूझकर ऐसा नहीं करते। वे रेंट चुकाना भूल जाते हैं, जिससे समस्या पैदा होती है।
बैंक के पास लॉकर तोड़ने का भी अधिकार होता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक की तरफ से हर कोशिश के बावजूद भी अगर ग्राहक रेंट नहीं चुकाता है और बैंक के पास तय प्रक्रिया के तहत लॉकर तोड़ने का अधिकार होता है। लेकिन, ऐसा तभी होता है जब ग्राहक तीन साल से ज्यादा समय तक लॉकर का रेंट नहीं चुकाया होता है। लॉकर तोड़ने के दौरान गवाह और बैंक के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं।
तय प्रक्रिया के तहत बैंक तोड़ता है लॉकर
लॉकर तोड़ने के बाद उसमें रखी चीजों (ज्वेलरी सहित) को सील कर दिया जाता है। यह तब तक बैंक के पास रखा रहता है जब तक ग्राहक इसके लिए बैंक के पास क्लेम नहीं करता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि लॉकर तोड़े जाने के बाद उसमें रखी चीजों को दोबारा हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
आपका लॉकर है तो इन बातें का रखें ध्यान
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपका बैंक में लॉकर है तो उसका रेंट पेमेंट आपको तय समय पर करना चाहिए। आप अपने किसी एक्टिव सेविंग्स अकाउंट से रेंट पेमेंट को लिंक्ड करा सकते हैं। इससे तय समय पर आपके अकाउंट से अपने आप लॉकर के रेंट का पैसा कट जाएगा। हालांकि, इसके लिए आपको अकाउंट में बैलेंस होना चाहिए। दूसरा, आपको उस बैंक में अपने फोन नंबर, पता और ईमेल आईडी में बदलाव की जानकारी जरूर देनी चाहिए, जिसमें आपका लॉकर है।