मैंने बैंक लॉकर में परिवार की गोल्ड ज्वैलरी रखी है, ज्वैलरी चोरी हो जाने पर क्या होगा?

घर में गोल्ड ज्वेलरी रखने में रिस्क होता है। ऐसे में बैंक का लॉकर उपयोगी लगता है। कई लोग कीमती चीजों के अलावा जरूरी डॉक्युमेंट्स भी लॉकर में रखते हैं। बैंक ग्राहक से लॉकर की फीस लेते हैं। ग्राहक जरूरत पड़ने पर लॉकर से ज्वेलरी निकाल सकता है और इस्तेमाल के बाद फिर रख सकता है

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 7:51 PM
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लॉकर की सुविधा सरकारी और प्राइवेट दोनों बैंक में होती है।

कई लोग सोने-चांदी की ज्वैलरी घर में रखना सुरक्षित नहीं समझते। घर में इनके चोरी होने का डर रहता है। ऐसे में उन्हें बैंक का लॉकर अच्छा विकल्प लगता है। कई लोग कीमती चीजों के अलावा जरूरी डॉक्युमेंट्स भी लॉकर में रखते हैं। बैंक ग्राहक से लॉकर की फीस लेते हैं। यह फीस सालाना होती है। लॉकर की सुविधा सरकारी और प्राइवेट दोनों बैंक में होती है। सवाल है कि अगर बैंक लॉकर में रखी ज्वैलरी चोरी हो जाए तो क्या होगा?

बैंक लॉकर पर आरबीआई के नियम लागू होते हैं

बैंक लॉकर पर आरबीआई के नियम लागू होते हैं। यह नियम सभी बैंकों के लॉकर पर एक समान लागू होते हैं। बैंक लॉकर के कई ग्राहक इन नियमों के बारे में ठीक तरह से नहीं जानते। उन्हें लगता है कि लॉकर में रखी ज्वैलरी अगर चोरी हो जाती है तो बैंक उसकी कीमत के बराबर उन्हें मुआवजा देगा। लेकिन, यह सच नहीं है।

ज्वेलरी चोरी होने पर मुआवजा का नियम तय है


आरबीआई का नियम कहता है कि लॉकर के मामले में बैंक की लायबिलिटी उसकी सालाना फीस की 100 गुना तक होती है। बैंक लॉकर के सालाना रेट का 100 गुना अमाउंट सिर्फ उस स्थिति में ग्राहक को देता है, जब लापरवाही, आग लगने, चोरी या बैंक स्टाफ के फ्रॉड से लॉकर में रखी चीजों को नुकसान होता है।

बैेंक लॉकर का इंश्योरेंस नहीं कराते

इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। अगर आप बैंक लॉकर का सालाना रेंट 3,000 रुपये चुकाते हैं तो आपको मैक्सिमम मुआवजा 3 लाख रुपये मिल सकता है। एक दूसरा तथ्य यह है कि बैंक लॉकर में रखी चीजों का इंश्योरेंस नहीं कराते। अगर ग्राहक लॉकर में रखी चीजों का इंश्योरेंस कराना चाहता है तो वह करा सकता है। आम तौर पर इंश्योरेंस कंपनियां लॉकर में रखी चीजों की वैल्यू का 0.5 से 1.2 फीसदी तक प्रीमियम लेती हैं।

वित्तमंत्री ने बताया लॉकर के मुआवजे का नियम

हाल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि आरबीआई ने क्यों चोरी की स्थिति में लॉकर का मुआवजा उसकी सालाना रेंट का 100 गुना तय किया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग के नियम बैंकों को यह देखने या इसका रिकॉर्ड रखने की इजाजत नहीं देते कि किसी ग्राहक ने अपने बैंक लॉकर में क्या-क्या रखा है।

बैंक लॉकर में रखी चीजों का रिकॉर्ड नहीं रख सकते

उन्होंने कहा, "यह देखना कि ग्राहक अपने लॉकर में किन चीजों को रखता है बैंकिंग रूल्स का उल्लंघन है। इसलिए बैंक ऐसा नहीं करते हैं। इसलिए यह तय करना मुश्किल है कि किस लॉकर का कितना कवरेज होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि चूंकि आइटम के हिसाब से वैल्यूएशन या इंश्योरेंस मुमकिन नहीं है, जिससे लॉकर के मामले में स्टैंडर्ड कंपनसेशन फ्रेमवर्क लागू होता है।

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बैंक लॉकर की सुरक्षा का पूरा इंतजाम रखते हैं

हालांकि, बैंक लॉकर की सुरक्षा का पूरा इंतजाम रखते हैं। आरबीआई के नियम के तहत लॉकर्स का सीसीटीवी सर्विलांस जरूरी है। सीसीटीवी के फुटेज 180 दिनों तक रखना जरूरी है। इसके अलावा लॉकर एरिया का एक्सेस काफी कम स्टाफ को होता है। वॉल्ट्स फायर-रेसिस्टेंट होते हैं। उन्हें इस तरह से बनाया जाता है कि प्राकृतिक आपदा में भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचता है।

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