Account Aggregator framework : पिछले 20 हफ्तों के दौरान अकाउंट एग्रीगेटर (एए) फ्रेमवर्क में जुड़ने बैंक खातों की संख्या में आठ गुनी से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि भारत के सबसे बड़े लेंडर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का इस पर लाइव होना यानी जुड़ना अभी बाकी है। इस फ्रेमवर्क से भारत में फाइनेंशियल डाटा की शेयरिंग में व्यापक बदलाव होने का अनुमान है।
20 हफ्तों में लिंक खातों की संख्या 80,000 हुई
एए इकोसिस्टम के लिए नॉट फॉर प्रॉफिट सेल्फ ऑर्गनाइज्ड कलेक्टिव साहामती द्वारा जारी डाटा के मुताबिक, लिंक्ड बैंक खातों की संख्या अब बढ़कर 80,000 हो गई है, जो सितंबर के दूसरे हफ्ते में 10,000 थी। इस इकोसिस्टम ने अभी तक 67,000 अनुरोध पूरे कर दिए हैं।
अकाउंट एग्रीगेटर रेग्युलेटेड एंटिटीज के बीच रियल टाइम बेसिस पर फाइनेंशियल इनफोर्मेशन को साझा करने की सुविधा देता है। एए को रिजर्व बैंक से लाइसेंस हासिल है, जो फाइनेंशियल इनफोर्मेशन प्रोवाइडर्स (एफआईपी) और फाइनेंशियल इनफोर्मेशन यूजर्स (एफआईयू) के बीच डाटा के प्रवाह को सक्षम बनाता है।
एफआईपी ऐसे इंस्टीट्यूशन हैं जिनके पास कस्टमर डाटा होता है और एफआईयू ऐसी इकाइयां हैं जो बेहतर सेवाएं देने, कर्ज देने आदि के लिए डाटा का इस्तेमाल करती हैं।
पिछले पांच महीनों में टेस्टिंग पर हुआ ज्यादा काम
पेरफियोस अकाउंट एग्रीगेशन सर्विसेज के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्रीकांत राजागोपालन ने कहा, “बीते पांच महीनों में सिस्टम की ज्यादातर टेस्टिंग हुईं और यह सुनिश्चित किया गया कि काम ठीक से चलता रहे। क्लिक-थ्रू रेट्स, सक्सेस रेट अच्छी रही। अब हमारा पहला काम एफआईपी और अलग-अलग तरह के खातों में बढ़ोतरी करना है।”
अभी तक, सिर्फ करंट और सेविंग खाते और डिपॉजिट्स को ही लिंक किया जा सकता है। स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एसएमई) खातों का बड़ा पूल और सिक्योरिटीज, इंश्योरेंस और म्यूचुअल फंड्स जैसे असेट क्लास को एए के लिए खोले जाने की जरूरत है। अगले कुछ महीनों में इसकी शुरुआत हो सकती है।
अब ज्यादा बैंकों को जोड़ने पर जोर
साहामती के को-फाउंडर और सीईओ बीजी महेश ने कहा, “अब हमारा जोर ज्यादा बैंकों को लाइव करने पर है। हमें सेक्टरों के बीच लागू करने, प्रोडक्ट और यूजर अनुभव पर भी काम करना है। इंश्योरेंस कंपनियों ने इसे लागू करने पर काम करना शुरू कर दिया है। म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए, हम अभी उनसे बातचीत कर रहे हैं।”
हालांकि, भारत में सबसे ज्यादा अकाउंट वाला एसबीआई प्राइसिंग मॉडल पर काम कर रहा है, क्योंकि बैंक कम्पंसेट यानी प्रतिपूर्ति चाहता है। इसकी वजह यह है कि वह सबसे बड़ा इनफोर्मेशन प्रोवाइडर है।