HDFC Bank Hikes MCLR: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी (HDFC Bank) का लोन आज से और महंगा हो गया है। HDFC Bank ने अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ लेंडिंग पेट (MCLR) में 0.10 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। बैंक के होम लोन, ऑटो लोन सहित कई तरह के लोन इसी MCLR से जुड़े होते हैं। ऐसे में MCLR में इजाफे के साथ इन लोन की दरें और उनकी ईएमआई भी बढ़ जाती है।
HDFC Bank के लोन की नई दरें 7 सितबंर 2022 से लागू हो गई हैं। बता दें कि मई महीने से यह 5वीं बार है, जब बैंक ने अपनी लोन की दरों में इजाफा किया है।
HDFC Bank ने एक साल के MCLR का रेट 8.10 फीसदी से बढ़ाकर 8.20 फीसदी कर दिया है। एक साल की एमसीएलआर काफी अहम होती है, क्योंकि होम लोन सहित लंबी अवधि के अधिकतर कर्ज इसी रेट से जुड़े होते हैं। इसका मतलब हुआ है कि होम लोन की ब्याज दर अब 8.20 फीसदी के आधार पर तय की जाएगी।
बैंक ने 6 महीने के MCLR का रेट 7.95 फीसदी से बढ़ाकर 8.05 फीसदी कर दिया है। वहीं तीन महीने के MCLR को 7.90 फीसदी से बढ़ाकर 8 फीसदी किया गया है, जबकि ओवरनाइट MCLR को 7.80 फीसदी से बढ़ाकर 7.90 फीसदी किया गया है। विभिन्न तरह के रिटेल लोन की दरें इन्हीं MCLR से जुड़ी होती हैं।
रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने मई से अगस्त के बीच तीन चरणों में रेपो रेट में कुल 1.40 फीसदी की बढ़ोतरी की, जिसके बाद रेपो रेट बढ़कर 5.40 फीसदी हो गया है। रेपो रेट वह दर होती है, जिससे बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना महंगा हो गया है, ऐसे में वे लगातार ग्राहकों पर बोझ डाल रहे हैं।
HDFC बैंक ने 7 जुलाई, 2022 को भी MCLR में 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। उसके बाद बैंक ने अगस्त महीने में भी रेपो रेट बढ़ने के बाद एससीएलआर बढ़ाया था। MCLR बढ़ने के बाद होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन और पर्सनल लोन समेत कई तरह के लोन अब ग्राहकों के लिए महंगे हो जाएंगे। साथ ही उन्हें ईएमआई भी अब अधिक देनी होगी।
अप्रैल, 2016 से शुरू हुई यह व्यवस्था
बैंकों ने अप्रैल, 2016 से एमसीएलआर का गणित शुरू किया, ताकि इस फॉर्मूले का इस्तेमाल विभिन्न अवधि के कर्ज के लिए ब्याज दरों की गणना में किया जा सके। सभी बैंक हर महीने अपने एमसीएलआर की समीक्षा करते हैं, ताकि कर्ज की सही लागत का आकलन किया जा सके। एमसीएलआर तय करते समय कर्ज की लागत और अन्य खर्चों को जोड़ा जाता है, ताकि एक सही ब्याज दर तय की जाती है।