वित्त मंत्रालय ने जनवरी-मार्च की अवधि के लिए छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस बास्केट में विभिन्न योजनाओं पर ब्याज दरें 4.0 प्रतिशत से 7.6 प्रतिशत तक होती हैं। यह लगातार सातवीं तिमाही है जिसमें संबंधित सरकारी बॉन्ड यील्ड्स में उतार-चढ़ाव के बावजूद छोटी बचत योजनाओं (Small savings schemes) पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये ब्याज दरें सरकार द्वारा प्रशासित और निर्धारित की जाती हैं लेकिन तुलनात्मक रूप से सिक्योरिटीज की यील्ड 0-100 बेसिस प्वाइंट्स पर सरकारी सिक्योरिटीज पर मार्केट यील्ड से जुड़ी होती हैं।
जनवरी-मार्च 2022 के लिए छोटी बचत ब्याज दरों के लिए संदर्भ अवधि सितंबर-नवंबर 2021 है जिसमें पांच साल के सरकारी बॉन्ड पर मार्केट यील्ड काफी हद तक अपरिवर्तित रही, हालांकि इसी अवधि में लॉन्ग टर्म यील्ड्स में वृद्धि हुई थी। उदाहरण के लिए बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड पर यील्ड अगस्त के अंत में अपने स्तर से नवंबर के अंत में 11 बीपीएस अधिक थी।
बता दें कि सरकारी बॉन्ड यील्ड सितंबर-नवंबर 2021 में अधिक बढ़ी, लेकिन पिछली तिमाहियों में गिर गए थे। हालांकि, छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
इस महीने की शुरुआत में, भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारियों ने अपने 'अर्थव्यवस्था की स्थिति' ('State of the Economy') वाले लेख में उल्लेख किया कि छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें जनवरी-मार्च 2022 के लिए फॉर्मूला-निर्धारित दरों से 42-168 बीपीएस अधिक थीं।
केंद्रीय बैंक ने समय-समय पर सरकार से छोटी बचत ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए फॉर्मूला-आधारित दृष्टिकोण पर टिके रहने का आह्वान किया है। अक्टूबर में अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) रिपोर्ट में आरबीआई ने चेतावनी दी थी कि छोटी बचत योजनाओं और बैंक डिपॉजिट्स पर ब्याज अंतर के परिणामस्वरूप 2018 के बाद से बैंक जमा की तुलना में पूर्व में लगातार वृद्धि हुई है। आरबीआई ने कहा, जब भी क्रेडिट की मांग बढ़ेगी, इसका मोनेटरी ट्रांसमिशन पर प्रभाव पड़ेगा।