Note Garland: शादियों का सीजन शुरू होते ही बाजार की रौनक बढ़ जाती है। वर -वधू के इस्तेमाल में आने वाले सामान से बाजार भर जाते हैं। इसमें फूलों की माला बिक रही है तो वहीं बाजार में बड़ी संख्या में नोटों की माला भी बिकनी शुरू हो जाती है। 10 रुपये से लेकर 500 रुपये तक के नोटों की माला अलग-अलग डिजाइन में दूल्हों के लिए तैयार कर दी जाती है। उत्तर भारत में होने वाली शादियों में कई इलाकों में दूल्हे को नोटों की माला से सजाया जाता है। लेकिन यह नोटों की माला कहीं आपके लिए गले की फांस न बन जाए। इस भी ध्यान देना बेहद जरूरी है।
अगर दूल्हे के गले में 500 रुपये के नोट की माला हो और उसे बनाने में 100 नोटों का भी उपयोग हुआ हो। तो यह माला 50000 रुपये का होता है। वहीं इस माले पर चोरों की भी नजर बनी रहती है। एक छोटी सी गलती से कब चोर माला पर हाथ साफ कर दें पता भी नहीं चलता।
उत्तर भारत की बात करें तो जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में यह रिवाज काफी चलन में है। कहीं सिर्फ दूल्हे को ही नोटों की माला से सजाते हैं तो कहीं दुल्हन को भी नोटों की माला से सजाया जाता है। शादी के कपड़े जहां बिकते हैं। वहीं नोटों की माला भी बनाई जाती है। इस समय 10 रुपये, 20 रुपये और 50 रुपये के नोटों की माला काफी बिक रहे हैं। अमीर व्यक्ति 100 और 500 रुपये के नोटों से बने माला भी पहन रहे हैं। इस माला में उपयोग हुए नोटों का तो दाम देना ही पड़ता है, माला बनाने की मजदूरी भी चुकानी पड़ती है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का नियमों के मुताबिक, नोटों की माला बनाना अवैध है। बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट (Banking Regulation Act, 1949) की धारा 35A के तहत करेंसी नोटों का इस्तेमाल सिर्फ लेन-देन के लिए किया जाना चाहिए। इसको स्टेपल करने, माला बनाने और पंडाल आदि में लगाने की मनाही है। रिजर्व बैंक ने इस बारे में एक क्लीन नोट पॉलिसी बना रखी है। RBI समय समय पर आम जनता से इस बारे में अपील भी करता रहता है कि माला बनाने के लिए नोटों का उपयोग ना किया जाए। ऐसा करने से नोट की उम्र घट जाती है।
नोट की माला बनाने वालों के खिलाफ दंड का प्रावधान नहीं है। ऐसे में रिजर्व बैंक सिर्फ अपील करके रह जाता है। लिहाजा नोट की माला पहनने वालों या बनाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है।