SBI ने 10.10% तक बढ़ाया बेस रेट, प्राइम लेंडिंग रेट में भी इजाफा, महंगी हो जाएगी इन लोन से जुड़ी EMI

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने लोन से जुड़े अपने बेस रेट (Base Rate) और बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह बढ़ोतपी 15 मार्च 2023 से लागू होगी। एसबीआई ने अपने बेट रेट में 0.70 का इजाफा किया है। इसके साथ ही बैंक का बेस रेट बढ़कर 10.10% पर पहुंच गया है, जो अभी तक 9.40% था

अपडेटेड Mar 14, 2023 पर 5:55 PM
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बैंक अब रेपो रेट लिंक्ड रेट (RRLR) के आधार पर लोन की दरें तय करते हैं

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने लोन से जुड़े अपने बेस रेट (Base Rate) और बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह बढ़ोतपी 15 मार्च 2023 से लागू होगी। एसबीआई ने अपने बेट रेट में 0.70 का इजाफा किया है। इसके साथ ही बैंक का बेस रेट बढ़कर 10.10% पर पहुंच गया है, जो अभी तक 9.40% था। इसके अलावा बैंक ने अपने बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) को भी बढ़ाकर 14.85% कर दिया है, जो अभी तक 14.15% था। इससे बीपीएलआर और बेस रेट से जुड़े कर्ज की ईएमआई महंगी हो जाएगा। दरअसल ये दोनों बैंक के पुराने बेंचमार्क हैं, जिसके आधार पर बैंक लोगों को लोन देता था।

अब इसकी जगह एक्सटर्नल बेंचमार्क बेस्ड लैंडिंग रेट (EBLR) या रेपो रेट लिंक्ड रेट (RRLR) के आधार पर दिए जाते हैं। हालांकि जिन लोन को पहले बेस रेट और BPLR पर लोन दिया जा चुका है, उन पर ये दरें अभी भी लागू हैं।

बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (BPLR) क्या है

कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, "यह बैंकों का एक बेंचमार्क रेट है, जिसके आधार पर होम लोन की दरें तय की जाती थी। BPLR को फंड्स की औसत लागत के आधार पर कैलकुलेट किया जाता था। हालांकि BPLR में पारदर्शिता की कमी थी क्योंकि कई बैंक अपने विशेष ग्राहकों को इससे कम दर पर लोन दे सकते थे। ऐसे में साल 2010 में RBI ने इसकी जगह बेस रेट सिस्टम को पेश किया था।"


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बेस रेट क्या होता है

कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, "बेस रेट, वह न्यूनतम ब्याज दर होती है, जिस पर भारतीय बैंक लोन दे सकते हैं। उन्हें इस दर से नीचे कोई भी लोन देने की इजाजत नहीं होती है। का सहारा लेने की अनुमति नहीं थी। बेस रेट को तय करने में बैंकों फंड्स हासिल करने की औसत लागत की अहम भूमिका होती है। RBI की नीतियों के मुताबिक, बैंकों को हर तिमाही अपने बेस रेट की समीक्षा करनी होती है। अप्रैल 2016 में RBI ने बेस रेट की जगह MCLR को पेश किया था।"

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