निवेशकों से एक सवाल पूछने पर जवाब अलग-अलग मिलते हैं। सवाल है कि एक करोड़ रुपये का फंड कैसा तैयार किया जा सकता है। ज्यादातर निवेशकों जवाब होता है कि इसके लिए मोटी सैलरी जरूरी है। कुछ इनवेस्टर्स बताते हैं कि अगर संयोग से मल्टीबैगर स्टॉक हाथ लग जाए तो ऐसा हो सकता है। लेकिन, यह सच नहीं है।
सिप से म्यूचुअल फंड में निवेश सबसे अच्छा तरीका
आज 20 प्लस या 30 प्लस का कोई व्यक्ति आसानी से एक करोड़ का फंड तैयार कर सकता है। इसके लिए निवेश में अनुशासन और जल्द शुरुआत जरूरी है। इस निवेश के लिए म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में सिप सबसे अच्छा तरीका है। इनवेस्टर को बाजार के उतारचढ़ाव पर ध्यान नहीं देना होगा।
निवेश में ज्यादातर इनवेस्टर्स का धैर्य टूट जाता है
ज्यादातर लोग सिर्फ इसलिए निवेश से बड़ा फंड तैयार नहीं कर पाते क्योंकि कुछ समय के बाद उनका धैर्य टूट जाता है। उदाहरण के लिए एक इनवेस्टर हर महीने सिप से 20,000 रुपये निवेश करना शुरू करता है। तीन साल में वह 7.2 लाख रुपये का निवेश करता है। इससे 10 फीसदी रिटर्न के साथ उसका फंड बढ़कर 8.7 लाख रुपये हो जाता है। लेकिन, यह उसे बहुत ज्यादा नहीं लगता है।
कंपाउंडिंग के फायदे के लिए निवेश को बढ़ने का समय दें
मार्केट्स में उतारचढ़ाव की वजह से कई बार रिटर्न गिर जाता है। इससे कई निवेशक सिप बंद कर देते हैं या किसी दूसरी स्कीम में स्विच कर जाते हैं। इससे वे कंपाउंडिंग का फायदा उठाने का मौका चूक जाते हैं। सच्चाई यह है कि शुरुआती कुछ सालों में कंपाउंडिग का असर नहीं दिखता है। सिप से निवेश में बड़ा वेल्थ क्रिएशन बाद के सालों में होता है। शुरुआत में आप निवेश के लिए आधार तैयार करते हैं। इस आधार से पैसा बाद में अपने आप बढ़ने लगता है।
सिर्फ 5 साल और निवेश करने से पैसा डबल हो जाता है
मान लीजिए एक इनवेस्टर सिप के जरिए एक इक्विटी फंड में हर महीने 40,000 रुपये का निवेश करता है। 10 फीसदी के सालाना रिटर्न से यह पैसा 10 साल साल में बढ़कर 80 लाख रुपये हो जाता है। अगर इस सिप को सिर्फ 5 साल के लिए बढ़ा दिया जाए तो यह पैसा बढ़कर दोगुना यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये हो जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि रिटर्न में कोई उछाल नहीं आता है बल्कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने से फर्क पड़ता है।
निवेश की अवधि कुछ साल बढ़ाने से बड़ा फर्क दिखता है
एक दूसरा इनवेस्टर सिप से हर महीने 20,000 रुपये इनवेस्ट करता है। 12 फीसदी सालाना रिटर्न से यह पैसा 15 साल में बढ़कर करीब 1 करोड़ रुपये हो जाता है। रिटर्न ज्यादा रहने पर इससे बड़ा फंड तैयार हो जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 10 साल के बाद निवेश को रोकने और 15 साल तक इसे जारी रखने से बहुत बड़ा फर्क देखने को मिलता है। इस उदाहरण से यह साफ हो जाता है कि बड़ा फंड तैयार करने के लिए बहुत जोड़-घटाव की जरूरत नहीं है।
एक करोड़ का फंड तैयार करने के लिए ये 4 बातें याद रखें
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप एक करोड़ या इससे बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं तो आपको सिर्फ कुछ बातों का ध्यान रखना है। पहला, जितना जल्द हो सके सिप की शुरुआत करें। अगर ज्यादा अमाउंट निवेश नहीं कर सकते तो छोटे अमाउंट से सिप शुरू कर दें। दूसरा, इनकम जैसे-जैसे बढ़ती है, अपने सिप अमाउंट को बढ़ाएं। तीसरा, मार्केट में करेक्शन या गिरावट के बावजूद सिप को नहीं रोकें। चौथा, कंपाउंडिंग के फायदे के लिए पैसे को बढ़ने का मौका दें। इसका मतलब लंबी अवधि तक निवेश करें।