Gold BIS: सरकार ने 2026 के रिवीजन के तहत देश के कई और जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग को अनिवार्य कर दिया है। अब इन जिलों में ज्वैलर्स बिना BIS हॉलमार्क वाली सोने की ज्वैलरी नहीं बेच सकेंगे। सरकार का कहना है कि इस फैसले से ग्राहकों को नकली या कम शुद्धता वाले सोने से बचाने में मदद मिलेगी और ज्वैलरी बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
नए नियम के तहत राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा के कई जिलों को इस सिस्टम में शामिल किया गया है। उदाहरण के तौर पर राजस्थान के बाड़मेर, बूंदी और करौली, गुजरात के बोटाद और मोरबी, कर्नाटक के गडग और रायचूर, तेलंगाना के मंचेरियल और पेद्दापल्ली तथा ओडिशा के नयागढ़ और सुंदरगढ़ जैसे जिले इसमें शामिल हैं।
क्या है BIS गोल्ड हॉलमार्किंग?
हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता की आधिकारिक पहचान होती है। यह बताती है कि ज्वैलरी में कितना शुद्ध सोना इस्तेमाल किया गया है। भारत में इस सिस्टम को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) नियंत्रित करता है। फिलहाल देश में 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट सोने की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग अनिवार्य है।
ज्वैलर्स को करना होता है रजिस्ट्रेशन
अगर कोई ज्वैलर हॉलमार्क वाली ज्वैलरी बेचना चाहता है, तो उसे पहले BIS से रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इसके बाद ज्वैलरी को BIS से मान्यता प्राप्त अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर में जांच के लिए भेजा जाता है। जांच में मानक सही पाए जाने पर ही ज्वैलरी पर हॉलमार्क लगाया जाता है।
2021 में शुरू हुई थी सिस्टम
सरकार ने पहली बार 23 जून 2021 को देश के 256 जिलों में गोल्ड हॉलमार्किंग को अनिवार्य किया था। अब नए जिलों को जोड़कर इस सिस्टम का दायरा और बढ़ा दिया गया है। इससे ग्राहकों को शुद्ध सोना खरीदने में ज्यादा भरोसा मिलेगा और बाजार में धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।
नए शामिल किए गए कुछ जिलों के नाम
नए शामिल किए गए कुछ जिले इस प्रकार हैं: