ब्रोकरेज रिपोर्ट्स से संकेत मिल रहे हैं कि ऑयल एंड गैस सेक्टर को बजट में राहत मिल सकती है। फ्यूल पर टैक्स में राहत मिलने के आसार हैं। आगामी बजट में न सिर्फ सीएनजी एक्साइज ड्यूटी में कटौती की जा सकती है, बल्कि एलपीजी सब्सिडी के लिए भी पर्याप्त फंड उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
सीएनजी एक्साइज ड्यूटी में कटौती: सरकार फिलहाल सीएनजी पर 14.4 पर्सेंट एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जिससे इसकी कीमत 9.5 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ जाती है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस ड्यूटी को कम कर इस सेक्टर से चीपर एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मेकेनिज्म (APM) की वापसी के असर को दुरुस्त किया जा सकता है।
एलपीजी नुकसान के लिए सब्सिडी: पब्लिक सेक्टर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) को सब्सिडी वाली एलपीजी गैस पर काफी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है। ऊंची ग्लोबल कीमतें और घरेलू स्तर पर सेलिंग रेट कम होने की वजह से यह चुनौती देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025 के पहले 9 महीनों के दौरान कुल अंडर रिकवरी 29,000 करोड़ रुपये थी। इससे निपटने के लिए सरकार सब्सिडी के तौर पर 35,000 करोड़ रुपये आवंटित कर सकती है। इसके तहत 10,000 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2025 के लिए और 25,000 करोड़ रुपये वित्त वर्ष 2026 के लिए आवंटित किए जा सकते हैं।
ऑयल प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाना: पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के दायरे में लाना इंडस्ट्री की अहम मांग रही है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) ने अपने बजट मेमोरेंडम में जीएसटी 2.0 का सुझाव दिया है, जिसमें पेट्रोल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और नेचुरल गैस को जीएसटी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है। हालांकि, राज्य सरकारों ने संभावित रेवेन्यू लॉस का हवाला देते हुए इस कदम का विरोध किया है।