Budget 2026-2027: कम टीडीएस, जल्द रिफंड सहित क्या-क्या चाहते हैं नई रीजीम के टैक्सपेयर्स?

टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि वित्तमंत्री यूनियन बजट में लोअर और मिडिल-इनकम ग्रुप के लिए टीडीएस घटाएंगी। मौजूदा नियमों की वजह से कई टैक्सपेयर्स के लिए गैर-जरूरी पेपरवर्क करना पड़ता है। उनके कैश-फ्लो पर भी असर पड़ता है

अपडेटेड Jan 28, 2026 पर 3:30 PM
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैक्स विवादों के जल्द निपटारे के लिए बजट में उपायों का ऐलान होना चाहिए।

यूनियन बजट 2026 पेश होने में कुछ दिन का समय रह गया है। टैक्सपेयर्स को इस बजट से कई उम्मीदें हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले कुछ बजरों में टैक्सपेयर्स के लिए बड़े एलान किए थे। पिछले साल बजट में उन्होंने सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थी।

लोअर और मिडिल इनकम ग्रुप के लिए टीडीएस घटना चाहिए

टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि वित्तमंत्री Union Budget में लोअर और मिडिल-इनकम ग्रुप के लिए टीडीएस घटाएंगी। मौजूदा नियमों की वजह से कई टैक्सपेयर्स के लिए गैर-जरूरी पेपरवर्क करना पड़ता है। उनके कैश-फ्लो पर भी असर पड़ता है। स्टेलर इनोवेशंस के वाइस प्रेसिडेंट (टैक्स एंड ट्रांजिशन) कार्तिक नारायण ने कहा, "अभी टीडीएस के रेट्स 10 से 30 फीसदी के बीच है। इससे सैलरीड एंप्लॉयीज और आंत्रप्रेन्योर्स दोनों का कैश-फ्लो घट जाता है।"


जल्द रिफंड के लिए बड़े उपाय करने की जरूरत

उन्होंने कहा कि जल्द रिफंड के लिए भी उपाय करने की जरूरत है। अभी टैक्सपेयर्स को रिफंड के लिए 6-12 महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। इससे अरबों रुपये की पूंजी का इस्तेमाल नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि रिफंड का प्रोसेस 30 दिन के अंदर पूरा करने के लिए एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। टीडीएस से एग्जेम्प्शन की सीमा भी बढ़ाकर 5,00,000 रुपये की जानी चाहिए। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूनियन बजट 2026 में टैक्स घटाने की जगह टैक्सपेयर्स की राहत के लिए छोटे-छोटे उपाय हो सकते हैं।

कम रेट्स और स्पष्ट टैक्स फ्रेमवर्क जरूरी 

बहुगुणा लॉ एसोसिएट्स के अंकित राजगढ़िया ने कहा कि फोकस स्लैब या रेट्स में बार-बार बदलाव की जगह स्टैबिलिटी पर होना चाहिए। कम रेट्स और स्पष्ट नियम वाला टैक्स फ्रेमवर्क जरूरी है। विवादों के जल्द निपटारे के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे से भी सिस्टम पर दबाव घटेगा। उन्होंने कहा कि नई टैक्स रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी।

रिफंड में देरी से कई परिवारों को होती है दिक्कत

रिफंड में देर से कई टैक्सपेयर्स को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। ऑटोमेशन बढ़ने के बावजूद एंप्लॉयर की फाइलिंग और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट में मामूली मिसमैच होने से रिफंड रुक जाता है। कई मामलों में ऐसे मिसमैच का एक्चुअल टैक्स-लायबिलिटी पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है। इसके बावजूद वेरिफिकेशन चेक शुरू हो जाता है, जिससे पूरा प्रोसेस सुस्त हो जाता है। कई परिवारों को रेगुलर इनवेस्टमेंट, ईएमआई और एजुकेशन से जुड़े खर्च को पूरा करने के लिए रिफंड्स का इंतजार रहता है।

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इनवेस्टर्स यूनियन बजट में स्टैबिलिटी चाहते हैं

इनवेस्टर्स का कहना है कि बजट 2026 में स्टैबिलिटी पर फोकस होना चाहिए। मास्टर कैपिटल सर्विसेज के चीफ रिसर्च अफसर रवि सिंह ने कहा कि इस बार सरकार के कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों में बदलाव करने की उम्मीद नहीं है। उनका कहना है कि लंबी अवधि के इनवेस्टर्स इससे पहले हुए बदलावों के साथ तालमेल बैठा चुके हैं।

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