भारत के केंद्रीय बजट 2026 में सीनियर सिटीजन सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक हो सकते हैं। सरकार की ओर से बुजुर्गों के लिए डिडक्शन बढ़ाए जाने और हेल्थकेयर से संबंधित राहत पर विचार किए जाने की उम्मीद है। यह बात डेलॉइट इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर तरुण गर्ग ने न्यूज एजेंसी ANI को एक खास इंटरव्यू में कही। उनके मुताबिक, "मैं इसे व्यक्तिगत टैक्स के नजरिए से कहूंगा कि सरकार सीनियर सिटीजन को कुछ और राहत देना चाहती है। मेडिकल खर्च बढ़ रहे हैं और उन्हें अपने हेल्थ बजट और हेल्थकेयर पर ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। इसलिए शायद सीनियर सिटीजन को कुछ अतिरिक्त डिडक्शन दिए जा सकते हैं।"
वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा। गर्ग ने कहा कि बैंक जमा और छोटी बचत योजनाओं से हासिल ब्याज आय पर डिडक्शन बढ़ाने की भी मांग बढ़ रही है। व्यक्तियों का एक बड़ा वर्ग है, जो कह रहा है कि इसे बढ़ाया जाना चाहिए। गर्ग का कहना है कि ब्याज आय पर ज्यादा छूट सीनियर सिटीजन को महंगाई और बढ़ती जीवन लागत से निपटने में मदद कर सकती है।
वर्तमान में आयकर कानून के सेक्शन 80TTA के तहत 60 साल से कम उम्र के व्यक्ति या HUF को किसी भी बैंक/को-ऑपरेटिव सोसाइटी/डाकघर में मौजूद उसके बचत खाते से 10000 रुपये सालाना तक की ब्याज आय पर इनकम टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता है। लेकिन इसके दायरे में FD, RD या कॉरपोरेट बॉन्ड से होने वाली ब्याज आय नहीं आती है। वहीं 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग यानि सीनियर सिटीजन- बचत खाते, FD/TD, पोस्ट ऑफिस स्कीम्स, को-ऑपरेटिव बैंक में किए गए किसी भी तरह के डिपॉजिट से एक वित्त वर्ष में हासिल होने वाले 50000 रुपये तक के ब्याज पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। ऐसा आयकर कानून के सेक्शन 80TTB के तहत है।
नई टैक्स व्यवस्था बेहतर बनाने पर दिया जा सकता है ज्यादा ध्यान
ANI के मुताबिक, गर्ग ने यह भी कहा कि बजट 2026 में बड़े बदलावों की घोषणा करने के बजाय नई टैक्स व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। एक लक्षित बदलाव प्रोविडेंट फंड में योगदान से संबंधित हो सकता है। गर्ग ने कहा कि सरकार एंप्लॉयर-ड्रिवन प्रोविडेंट फंड डिडक्शन को नई टैक्स व्यवस्था में लाने पर विचार कर सकती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन में भी है गुंजाइश
गर्ग के मुताबिक, स्टैंडर्ड डिडक्शन भी एक ऐसा क्षेत्र है जहां सीमित राहत दी जा सकती है। नए टैक्स सिस्टम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट को और बढ़ाया जा सकता है, शायद 25,000 रुपये या उससे ज्यादा। टैक्स रेट्स को तर्कसंगत बनाए जाने पर गर्ग ने सावधानी बरते जाने की बात कही। उन्होंने कहा, "रेट में बदलाव के नजरिए से, मुझे नहीं लगता कि ज्यादा कुछ होगा। नए टैक्स सिस्टम के तहत स्लैब रेट्स में बदलाव होने की संभावना नहीं है। हालांकि सरचार्ज के मामले में कुछ बदलाव हो सकते हैं, क्योंकि सरकार महंगाई के दबाव को कम करने की कोशिश कर रही है। कुल मिलाकर, गर्ग ने कहा कि बजट 2026 में पर्सनल इनकम टैक्स के मामले में बड़े सुधारों के बजाय टारगेटेड राहत और प्रशासनिक आसानी को प्राथमिकता दी जाएगी।