देश की अर्थव्यवस्था के लिए कृषि आज भी रीढ़ की हड्डी बनी हुई है। कृषि क्षेत्र में 46 फीसदी लोगों को रोजगार मिला हुआ है। लेकिन, ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में इसका योगदान सिर्फ 18-20 फीसदी है। यह कृषि क्षेत्र में कम प्रोडक्टिविटी का संकेत है। कृषि क्षेत्र में इनकम इनफ्लेशन रेट से कम है और जलवायु को लेकर रिस्क बढ़ रहा है। 2026 में अल नीनो का असर देखने को मिल सकता है। ऐसे कृषि क्षेत्र एक बार फिर यूनियन बजट को उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
फिस्कल ट्रांसफर की जगह स्ट्रक्चर रिफॉर्म्स जरूरी
सरकार पीएम-किसान योजना के तहत किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक मदद देती है। इसे पिछले कई सालों से बढ़ाया नहीं गया है। सरकार को किसानों की इनकम बढ़ाने के लिए फिस्कल ट्रांसफर की जगह स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स करने की जरूरत है। प्राइस रियलाइजेशन और कृषि आय बढ़ाने में कृषि निर्यात की बड़ी भूमिका हो सकती है। स्टेबल एक्सपोर्ट पॉलिसी से किसानों की इनकम बढ़ेगी और साथ में ग्लोबल फूड हब के रूप में इंडिया की स्थिति मजबूत होगी।
कृषि से दूसरे सेक्टर में लोगों को शिफ्ट करने से होगा फायदा
देश की 46 फीसदी आबादी रोजगार के लिए कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। लेकिन, जीवीए में कृषि का योगदान सिर्फ 18-20 फीसदी है। यह कृषि क्षेत्र में कम उत्पादकता का संकेत है। कृषि क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए अतिरिक्त लोगों (लेबर) को दूसरे सेक्टर में शिफ्ट करने की जरूरत है। उत्पादकता में इजाफा, मार्केट तक पहुंच और फाइनेंशियल इनक्लूजन की मदद से किसानों की आय बढ़ाने के उपाय होने चाहिए।
इंफ्रा के अभाव में हर साल 10-15 फीसदी फसल बर्बाद हो जाती है
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा कृषि उत्पादन वाले देशों में शामिल है। लेकिन, कुल उत्पादन का करीब 10-15 फीसदी हर साल बर्बाद हो जाता है। इससे सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। कोल्ड स्टोरेज की कमी, क्लाइमेंट कंट्रोल्ड वेयरहाउसेज का अभाव, खराब लॉजिस्टिक्स और मॉर्डन टेक्नोलॉजी का अपर्याप्त इस्तेमाल इसके कारण हैं। नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (e-NAM) जैसे प्लेटफॉर्म का मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना और प्राइस डिस्कवरी हैं। लेकिन, इससे होने वाले बदलाव की रफ्तार सुस्त है।
स्टोरेज, सिंचाई, लॉजिस्टिक्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी पर बढ़ाना होगा फोकस
सरकार यूनियन बजट 2026 में किसानों को ध्यान में रख कृषि क्षेत्र के लिए बड़े ऐलान कर सकती है। सरकार का फोकस स्टोरेज, सिंचाई, लॉजिस्टिक्स, आधुनिक टेक्नोलॉजी तक आसान पहुंच और एपीएमसी के लिए मजबूत और लीगल फ्रेमवर्क पर होना चाहिए। इससे किसानों को अपने उत्पाद की उचित कीमत मिलेगी। इससे उनकी इनकम बढ़ेगी।
जीडीपी ग्रोथ और कृषि क्षेत्र की ग्रोथ के बीच बड़ा अंतर
2013 से अब तक एग्रीकल्चर और किसानों के वेल्फेयर से जुड़ा बजट छह गुना हुआ है। FY14 में यह 21,933 करोड़ रुपये था, जो FY26 में बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। लेकिन, जीडीपी की ग्रोथ और कृषि क्षेत्र की ग्रोथ के बीच बड़ा फर्क बना हुआ है। FY26 में जीडीपी ग्रोथ 7.4 फीसदी रहने की उम्मीद है, जबकि कृषि और इससे संबंधित सेक्टर की ग्रोथ सिर्फ इस दौरान सिर्फ 3.1 फीसदी रहने की उम्मीद है।