नॉन-रेजिडेंट्स इंडियंस (एनआरआई) लंबे समय से प्रॉपर्टी बेचने से जुड़े टैक्स के नियमों में राहत की मांग कर रहे हैं। अभी रेजिडेंट्स और एनआरआई के प्रॉपर्टी बेचने पर टीडीएस के अलग-अलग नियम लागू होते हैं। एनआरआई के प्रॉपर्टी बेचने पर टीडीएस के रूप में उसका काफी पैसा फंसा रह जाता है। इससे उसे काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रॉपर्टी बेचने पर रेजिडेंट्स और एनआरआई के टैक्स के अलग-अलग नियम
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार एनआरआई के प्रॉपर्टी बेचने से जुड़े टैक्स के नियमों को आसान बनाती है तो उन्हें काफी राहत मिलेगी। अभी अगर रेजिडेंट प्रॉपर्टी बेचता है तो टीडीएस डिपॉजिट के नियम आसान हैं। प्रॉपर्टी की वैल्यू 50 लाख या इससे ज्यादा होने पर प्रॉपर्टी खरीदने वाले को पर्चेज वैल्यू का 1 फीसदी बतौर टीडीएस डिडक्ट करना जरूरी है। अगर कोई एनआरआई प्रॉपर्टी बेचता है तो खरीदारा को ज्यादा रेट से टीडीएस डिडक्ट करना पड़ता है। उसे टैन (TAN) भी लेना पड़ता है। काटा गया टैक्स डिपॉजिट करना पड़ता है और ई-टीडीएस रिटर्न फाइल करना पड़ता है।
एनआरआई के प्रॉपर्टी बेचने पर टीडीएस के रेट्स काफी ज्यादा
अगर एनआरआई 24 महीनों के बाद प्रॉपर्टी बेचता है तो बायर को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) के रूप में 12.5 फीसदी टीडीएस डिडक्ट करना पड़ता है। 24 महीने से पहले बेचने पर बायर को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर 30 फीसदी रेट से टीडीएस डिडक्ट करना पड़ता है। टीडीएस बिक्री कीमत पर काटना पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने में बायर के लिए कंप्लायंस बढ़ जाता है। साथ ही प्रॉपर्टी बेचने वाले (NRI) पर भी टैक्स का बोझ बढ़ जाता है।
नो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया भी जटिल
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया भी जटिल है। इसमें काफी समय लगता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस नियमों को आसान बनाया जा सकता है। सरकार रेजिडेंट और एनआरआई के प्रॉपर्टी बेचने से जुड़े टैक्स के नियमों के बीच के फर्क को कम कर सकती है। एनआरआई के लिए भी रजिडेंट्स सेलर्स की तरह चलान-कम-स्टेटमेंट के नियम शुरू किए जा सकते हैं।
यह भी पढ़ें: Income Tax Budget 2026: यूनियन बजट में इन 5 बड़े ऐलानों से टैक्सपेयर्स की दूर हो जाएंगी शिकायतें
सरकार बजट में नियमों को आसान बनाने का कर सकती है एलान
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस टैक्स नियमों को आसान बनाने पर रहा है। Union Budget 2020 में उन्होंने इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी। उसके बाद से उन्होंने इसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए लगातार कोशिश की है। अब उनकी कोशिश इनकम टैक्स से जुड़े दूसरे नियमों को भी आसान बनाने पर होना चाहिए।