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₹8 से ₹15 लाख तक टैक्सेबल इनकम: पुरानी आयकर व्यवस्था बेहतर या नई, कैलकुलेशन से समझें

नई आयकर व्यवस्था ने मिडिल क्लास के लिए टैक्स में काफी कमी की है और उनके हाथ में खपत, बचत और निवेश के लिए अधिक पैसा छोड़ा है। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़ा है

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jan 15, 2026 पर 3:59 PM
₹8 से ₹15 लाख तक टैक्सेबल इनकम: पुरानी आयकर व्यवस्था बेहतर या नई, कैलकुलेशन से समझें
पिछले बजट के दौरान जिन प्रमुख उद्देश्यों पर जोर दिया गया, उनमें ‘व्यक्तिगत आयकर सुधार, विशेष रूप से मिडिल क्लास पर फोकस’ शामिल था।

सरकार लगातार नई आयकर व्यवस्था को पुरानी आयकर व्यवस्था से ज्यादा आकर्षक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसे सरल, अनुपालन के लिए आसान और करदाताओं के लिए डिफॉल्ट विकल्प के रूप में पेश किया गया है। केंद्रीय बजट 2025 में किए गए बदलावों से नई आयकर व्यवस्था और अधिक आकर्षक बन गई है, खास तौर पर मिडिल क्लास के लिए। पिछले बजट के दौरान जिन प्रमुख उद्देश्यों पर जोर दिया गया, उनमें ‘व्यक्तिगत आयकर सुधार, विशेष रूप से मिडिल क्लास पर फोकस’ शामिल था। इससे पहले भी सरकार ने समय-समय पर नई आयकर व्यवस्था में टैक्स स्लैब्स को लेकर प्रगतिशील बदलाव किए हैं, ताकि मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ कम रहे।

CBDT के आंकड़ों पर जाएं तो वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह व्यक्तिगत करदाताओं के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।

पुरानी और नई आयकर व्यवस्था के टैक्स स्लैब्स पर एक नजर

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