Income Tax Budget 2026: क्या टैक्सपेयर्स को इस बार भी बड़ा तोहफा दे सकती हैं निर्मला सीतारमण?

इस साल इनकम टैक्स का नया एक्ट लागू होने जा रहा है।यह दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में इनकम टैक्स कानून में बुनियादी बदलाव नहीं किए गए हैं। टैक्स के रेट्स में भी बदलाव नहीं किया गया है। इसमें फोकस टैक्स के नियमों के लैंग्वेज को आसान बनाने पर है

अपडेटेड Jan 15, 2026 पर 7:10 AM
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वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस इस बार इनकम टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को यूजर-फ्रेंडली बनाने पर हो सकता है।

टैक्सपेयर्स की नजरें यूनियन बजट 2026 पर लगी हैं। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। वित्तमंत्री का फोकस टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर रहा है। उन्होंने यूनियन बजट 2020 में बड़े टैक्स रिफॉर्म्स का ऐलान किया था। उन्होंने टैक्सपेयर्स को नई रीजीम का विकल्प दिया था। सरकार ने इस रीजीम की शुरुआत उन टैक्सपेयर्स के लिए की थी, जो डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस का फायदा नहीं उठाते हैं। वित्तमंत्री ने नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने की काफी कोशिश की है।

पिछले साल बजट में टैक्सपेयर्स को मिला था तोहफा 

यूनियन बजट 2025 में वित्तमंत्री ने सालाना 12 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स-फ्री करने का ऐलान किया था। इसे बड़े टैक्स रिफॉर्म्स के रूप में देखा गया। उन्होंने टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया। बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट भी बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी थी। यह सभी ऐलान इनकम टैक्स की नई रीजीम के लिए थे। नई रीजीम में वह स्टैंडर्ड डिडक्शन 2024 में ही बढ़ाकर 75,000 रुपये कर चुकी हैं। स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों को मिलता है।


इस साल इनकम टैक्स का नया एक्ट लागू होने जा रहा है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल इनकम टैक्स का नया एक्ट लागू होने जा रहा है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 इस साल 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। यह दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। नए एक्ट में इनकम टैक्स कानून में बुनियादी बदलाव नहीं किए गए हैं। टैक्स के रेट्स में भी बदलाव नहीं किया गया है। इसमें फोकस टैक्स के नियमों के लैंग्वेज को आसान बनाने पर है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के नियमों की भाषा काफी जटिल है। इसे आम आदमी को समझने में दिक्कत आती है।

टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन पर हो सकता है सरकार का फोकस

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का फोकस इस बार इनकम टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को यूजर-फ्रेंडली बनाने पर हो सकता है। वह रिटर्न की प्रोसेसिंग को फास्ट बनाने, रिफंड के मामलों में तेजी लाने, टैक्स से जुड़े विवादों के सेटलमेंट के लिए उपायों का ऐलान कर सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे कंप्लायंस बढ़ेगा। कंप्लायंस बढ़ने से सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा। टैक्स से जुड़े विवादित मामलों में काफी पैसा फंसा हुआ है। अगर ऐसे मामलों के सेटलमेंट के लिए स्कीम आती है तो इससे सरकार और टैक्सपेयर्स दोनों को फायदा होगा।

नई रीजीम में भी कुछ डिडक्शंस का हो सकता है ऐलान

टैक्स के जानकारों का कहना है कि पुरानी रीजीम में सरकार ने पिछले कुछ सालों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है। इस रीजीम में मिलने वाले कुछ डिडक्शंस नई रीजीम में भी शुरू किए जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को कम से कम तीन डिडक्शंस का फायदा नई रीजीम के टैक्सपेयर्स को भी देना चाहिए। इनमें टर्म लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और होम लोन के इंटरेस्ट पर डिडक्शन शामिल हैं। इससे नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी और बढ़ेगी।

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