Budget Expectation 2026: क्या NRI को मिलेगी बजट में राहत? होमबायर्स को हो सकता है फायदा

Budget Expectation 2026: केंद्रीय बजट 2026 से पहले एनआरआई और भारत में घर खरीदने वालों दोनों की निगाहें रियल एस्टेट से जुड़े टैक्स नियमों पर टिकी हैं

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 5:03 PM
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केंद्रीय बजट 2026 से पहले एनआरआई और भारत में घर खरीदने वालों दोनों की निगाहें रियल एस्टेट से जुड़े टैक्स नियमों पर टिकी हैं।

Budget Expectation 2026: केंद्रीय बजट 2026 से पहले एनआरआई और भारत में घर खरीदने वालों दोनों की निगाहें रियल एस्टेट से जुड़े टैक्स नियमों पर टिकी हैं। वजह साफ है। एनआरआई के लिए प्रॉपर्टी बेचने के मौजूदा नियम जटिल हैं और खरीदारों के लिए भी सिरदर्द बन जाते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि सरकार इस बजट में कुछ ऐसे बदलाव करे, जिनसे एनआरआई को राहत मिले और घरेलू होमबायर्स के लिए डील आसान हो।

एनआरआई बनाम रेजिडेंट: टीडीएस का बड़ा फर्क

आज की तारीख में रेजिडेंट भारतीय अगर 50 लाख रुपये से ऊपर की प्रॉपर्टी बेचता है, तो खरीदार सिर्फ 1% टीडीएस काटता है। लेकिन एनआरआई के मामले में तस्वीर अलग है। यहां खरीदार को सेल मूल्य पर काफी ज्यादा टीडीएस काटना पड़ता है लॉन्ग टर्म में 12.5% और शॉर्ट टर्म में 30% तक। नतीजा यह कि एनआरआई विक्रेता की बड़ी रकम टीडीएस में अटक जाती है और कैश फ्लो बिगड़ जाता है।


खरीदारों के लिए भी बढ़ती परेशानी

एनआरआई से घर खरीदना सिर्फ महंगा नहीं, जटिल भी है। खरीदार को टीडीएस काटने के साथ TAN लेना पड़ता है, टैक्स जमा करना होता है और ई-टीडीएस रिटर्न फाइल करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली है और गलती की गुंजाइश भी ज्यादा रहती है। बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार एनआरआई डील्स के लिए भी आसान ‘चालान-कम-स्टेटमेंट’ जैसी व्यवस्था लाए, जिससे खरीदारों का बोझ कम हो।

लो-टैक्स सर्टिफिकेट: समय की मार

एनआरआई कम टीडीएस कटवाने के लिए ‘लो-टैक्स डिडक्शन सर्टिफिकेट’ ले सकते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी और अनिश्चित है। कई बार डील तय होने तक सर्टिफिकेट नहीं मिलता, जिससे सौदा अटक जाता है। अगर बजट में इसे पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध बना दिया गया, तो एनआरआई को राहत मिलेगी और डील्स तेजी से पूरी होंगी।

होमबायर्स को कैसे होगा फायदा

टैक्स नियम आसान होंगे तो एनआरआई विक्रेता ज्यादा सक्रिय होंगे। इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी, कीमतों पर दबाव घटेगा और खरीदारों को बेहतर विकल्प मिलेंगे। साथ ही, क्लोजिंग टाइम कम होगा और कानूनी जोखिम भी घटेंगे।

बजट से क्या उम्मीद

अगर सरकार टीडीएस दरों में संतुलन लाती है, अनुपालन आसान करती है और रेमिटेंस प्रक्रिया को सरल बनाती है, तो एनआरआई का भरोसा बढ़ेगा। इसका सीधा फायदा रियल एस्टेट बाजार और होमबायर्स दोनों को मिलेगा। बजट 2026 से यही सबसे बड़ी उम्मीद है।

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