CGHS: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए CGHS के तहत इलाज कराना आसान तो है, लेकिन हाल के दिनों में OPD कंसल्टेशन फीस को लेकर कन्फ्यूजन था। कई लाभार्थियों को यह साफ नहीं था कि 350 रुपये और 700 रुपये की फीस किस इलाज पर लागू होगी और किस पर नहीं। अब स्वास्थ्य मंत्रालय ने फीस और इसके स्ट्रक्चर को लेकर जरूरी जानकारी दी है। CGHS देश की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में से एक है। इसके तहत करीब 1 करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनर्स इलाज की सुविधा लेते हैं।
350 रुपये और 700 रुपये की OPD फीस कब मिलेगी?
मंत्रालय ने बताया है कि 350 रुपये और 700 रुपये की OPD कंसल्टेशन फीस हर डॉक्टर या हर इलाज पर लागू नहीं होती। ये चार्ज सिर्फ उन्हीं मामलों में मान्य होंगे, जहां मरीज का इलाज सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर कर रहा हो।
यहां सुपर-स्पेशलिस्ट का मतलब ऐसे डॉक्टर से है जिनके पास DM (Doctor of Medicine) या MCh (Master of Chirurgiae) की मान्यता प्राप्त डिग्री हो। साथ ही यह इलाज CGHS एम्पैनल्ड अस्पताल में उसी सुपर-स्पेशलिटी से जुड़ा होना चाहिए। अगर इन शर्तों में से कोई भी पूरी नहीं होती, तो 700 रुपये की फीस CGHS के तहत मान्य नहीं होगी।
सामान्य OPD और IPD में क्या नियम हैं?
OPD कंसल्टेशन के लिए 350 रुपये की फीस लागू है।
यही 350 रुपये फीस IPD (इन-पेशेंट) कंसल्टेशन पर भी मान्य है।
हालांकि, यह फीस भी तभी मान्य होगी जब CGHS के नियम पूरे हों।
IPD मरीजों के लिए कंसल्टेशन की लिमिट।
मंत्रालय ने IPD मामलों में पहले से लागू नियम को दोहराया है। एक मरीज को, एक दिन में, एक स्पेशलिस्ट से अधिकतम 2 कंसल्टेशन की ही अनुमति होगी इससे ज्यादा कंसल्टेशन CGHS में पेमेंट योग्य नहीं होंगे।
पेंशनर्स अपने शहर के CGHS अतिरिक्त निदेशक कार्यालय से कार्ड बनवा सकते हैं। कर्मचारी अपने विभाग के जरिए फॉर्म जमा कर सकते हैं। फॉर्म CGHS की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है
CGHS का मंथली योगदान कितना है?
लेवल 12 और उससे ऊपर: 1,000 रुपये
पेंशनर्स सालाना या एकमुश्त (10 साल) पेमेंट का विकल्प चुन सकते हैं।
अस्पताल में वार्ड किसे मिलेगा?
CGHS कार्ड पर वार्ड की सुविधा बेसिक सैलरी के आधार पर मिलती है।
36,500 रुपये तक: जनरल वार्ड
36,501–50,500 रुपये: सेमी-प्राइवेट
50,501 रुपये से ज्यादा: प्राइवेट वार्ड
अगर आप CGHS के तहत इलाज करवा रहे हैं, तो डॉक्टर की योग्यता जरूर चेक करें। अस्पताल का CGHS-एम्पैनल्ड होना जरूरी है। बिल बनवाते समय OPD/IPD नियम समझना फायदेमंद रहेगा।