यूनियन बजट 2026 पेश होने से पहले टैक्स एक्सपर्ट्स ने सरकार को कुछ खास सलाह दी है। इनमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (एलटीसीजी) टैक्स में कमी, एग्जेम्प्शंस की ज्यादा लिमिट, एसेट क्लासेज के लिए एक समान होल्डिंग पीरियड और दोबारा इंडेक्सेशन बेनेफिट्स की शुरुआत शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे टैक्स का बोझ कम करने में मदद मिलेगी, लंबी अवधि के सेविंग्स को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
सरकार ने जुलाई 2024 में एलटीसीजी टैक्स 12.5 फीसदी किया था
सरकार ने जुलाई 2024 में पेश यूनियन बजट में सभी एसेट क्लास पर एक समान 12.5 फीसदी के रेट से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स का ऐलान किया था। इसमें रियल एस्टेट्स, म्यूचुअल फंड्स, शेयर, गोल्ड और बॉन्ड्स शामिल थे। हालांकि, इनके होल्डिंग पीरियड में फर्क था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को एलटीसीज टैक्स को 12.5 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी करना चाहिए।
सरकार एलटीसीजी की टैक्स-फ्री लिमिट भी बढ़ा सकती है
सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर कुणाल सवानी ने कहा, "एलटीसीजी टैक्स को घटाकर 10 फीसदी करने से न सिर्फ टैक्सपेयर्स पर टैक्स का बोझ घटेगा, बल्कि इससे फिर से इंडिया में निवेश आएगा।" कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार एलटीसीजी टैक्स रेट घटाने की जगह एलटीसीजी की टैक्स-फ्री लिमिट बढ़ा सकती है या होल्डिंग पीरियड के नियमों में बदलाव कर सकती है। अभी म्यूचु्अल फंड की इक्विटी स्कीम 1 एक साल बाद बेचने पर एलटीसीजी लागू होता है, जबकि रियल एस्टेट के होल्डिंग पीरियड दो साल है।
शेयर और म्यूचुअल फंड्स के 1.25 लाख रुपये LTCG पर टैक्स नहीं
यह ध्यान में रखना जरूरी है कि शेयर और म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम से एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक के कैपिटल गेंस पर टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है। वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने कहा, "एलटीसीजी की टैक्स-फ्री लिमिट 1.25 लाख से बढ़ाकर 2-2.5 लाख रुपये करने से छोटे निवेशकों को फायदा होगा और सरकार का टैक्स कलेक्शन बढ़ेगा।" सिंघानिया एंड कंपनी में पार्टनर रीतिका नायर का मानना है कि एसेट क्लासेज के होल्डिंग पीरियड में बदलाव की गुंजाइश है।
सरकार इंडेक्सेशन बेनेफिट्स की दोबारा कर सकती है शुरुआत
सरकार इंडेक्सेशन बेनेफिट्स को दोबारा शुरू कर सकती है। 2024 के बजट में इंडेक्सेशन बेनेफिट्स को दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस बेनेफिट्स को वापस लेने से रियल एस्टेट और गोल्ड इनवेस्टर्स की मुस्किल बढ़ी है। सीबीडीटी के मुताबिक, इंडेक्सेशन एक प्रोसेस है, जिसके तहत किसी कैपिटल एसेट के एक्विजिशन या इम्प्रूवमेंट कॉस्ट को इनफ्लेशन में वृद्धि के साथ एडजस्ट किया जाता है।
डेट म्यूचुअल फंड्स के निवेशकों को मिल सकती है राहत
यूनियन बजट 2024 में लिस्टेड शेयर्स, इक्विटी म्यूचुअल फंड्स, बिजनेस ट्रस्ट्स, गोल्ड, बॉन्ड्स और 23 जुलाई, 2024 के बाद खरीदी गई प्रॉपर्टी के लिए इंडेक्सेशन बेनेफिट्स खत्म कर दिया गया था। इसकी जगह सरकार ने एलटीसीजी टैक्स का एक समान 12.5 फीसदी रेट तय किया था। जैन ने कहा कि बाजार को उम्मीद है कि सरकार 36 महीनों से ज्यादा समय तक रखे गए डेट म्यूचुअल फंड्स के लिए इंडेक्सेशन शुरू कर सकती है।