टैक्सपेयर्स सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले डिडक्शन का सबसे ज्यादा फायदा उठाते हैं। इस सेक्शन के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस आते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार ने 2014 के बाद इस सेक्शन के तहत डिडक्शन की लिमिट नहीं बढ़ाई है। अभी एक वित्त वर्ष में इस सेक्शन के तहत मैक्सिमम 1.5 लाख रुपये का डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। सवाल है कि क्या वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश बजट में सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाएंगी?
80सी के तहत डिडक्शन सिर्फ ओल्ड रीजीम में
टैक्स एक्सपर्ट्स ने सरकार को सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अब भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल कर रहे हैं। सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत सिर्फ ओल्ड रीजीम में है। पिछले कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। इसे ध्यान में रखते हुए सेक्शन 80 के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़नी चाहिए।
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80सी के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट ऑप्शंस
सेक्शन 80सी के तहत करीब एक दर्जन इनवेस्टमेंट के ऑप्शंस आते हैं। इनमें पीपीएफ, म्यूचुअल फंड की टैक्स स्कीम, लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल हैं। इस सेक्शन के तहत कोई व्यक्ति अपने दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर डिडक्शन क्लेम कर सकता है। यह ऐसा डिडक्शन है, जो निवेश नहीं बल्कि खर्च पर मिलता है। कई टैक्सपेयर्स इस डिडक्शन का फायदा उठाते हैं। सेक्शन 80सी के तहत होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत है।
परिवारों में सेविंग्स और इनवेस्टमेंट को बढ़ावा मिलेगा
सरकार सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन की लिमिट बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये कर सकती है। इससे बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स खासकर होम लोन ले चुके लोगों को राहत मिलेगी। परिवारों में सेविंग्स और इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देने में सेक्शन 80सी का बड़ा हाथ रहा है। इसके तहत पीपीएफ और म्यूचुअल फंड्स की टैक्स स्कीम आती हैं। दोनों लंबी के निवेश के लिहाज से निवेश के अच्छे विकल्प हैं। दोनों का रिटर्न भी अच्छा है। पिछले कुछ सालों में परिवारों की सेविंग्स में गिरावट देखने को मिली है। सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाने से सेविंग्स में गिरावट को रोका जा सकता है।