कई लोग कुछ सालों की नौकरी के बाद घर खरीदने का प्लान बनाना शुरू कर देते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि व्यक्ति पर जब आर्थिक जिम्मेदारियां कम होती है तो उसके लिए घर खरीदना आसान होता है। लेकिन, जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बढ़ती हैं घर खरीदना मुश्किल होता जाता है। अगर आप होम लोन लेकर घर खरीद रहे हैं तो ज्यादा उम्र में ऐसा करना रिस्की हो सकता है।
मिड-करियर में पहुंचने पर जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिड-करियर में पहुंचने पर व्यक्ति पर एक साथ कई जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। व्यक्ति अच्छी कमाई के बावजूद कई तरह के खर्चों के बोझ से दबा रहता है। उसे बच्चों की पढ़ाई के खर्च का ध्यान रखना पड़ता है। माता-पिता के स्वास्थ्य का खास ख्याल रखना पड़ता है। इस पर काफी पैसे खर्च होते है। इसके अलावा खुद के रिटायरमेंट के बारे में भी सोचना पड़ता है।
बच्चों की पढ़ाई पर आज मातापिता का काफी पैसा खर्च होता है
आजकल बच्चों की पढ़ाई पर मातापिता का काफी पैसा खर्च हो जाता है। ऐसे में होम लोन लेकर हर महीने EMI चुकाने पर व्यक्ति पर वित्तीय दबाव बढ़ जाता है। होम लोन की अवधि 15-20 साल तक होती है। ऐसे में मिड-करियर में प्रवेश कर चुका व्यक्ति 15-20 साल तक ईएमआई चुकाने को लेकर सहज महसूस नहीं करता है।
करियर के शुरुआती सालों में घर खरीदना आसान होता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपने करियर के शुरुआती सालों में घर नहीं खरीदा तो फिर 45 या इससे ज्यादा उम्र में होम लोन लेकर घर खरीदने से आप पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में किराये का घर अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे आपके पास बच्चों की पढ़ाई पर फोकस करने का पूरा मौका होगा।
घर खरीदने से कैश-फ्लो का बड़ा हिस्सा लॉक हो जाता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि घर खरीदने से कैश-फ्लो लॉक हो जाता है। किराए के घर पर रहने से लिक्विडिटी बनी रहती है। इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई बल्कि माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्यों के हेल्थ से जुड़े इश्यू को संभालने के लिए आपके पास गुंजाइश होती है। आपको इलाज या इस तरह के जरूरी खर्चों के लिए ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर पर्सनल लोन लेने को मजबूर नहीं होना पड़ता है।
कोविड के बाद घरों की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं
कोविड के बाद घरों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इस अनुपात में लोगों की इनकम नहीं बढ़ी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप मिड-करियर में हैं और आपकी जॉब में ट्रांसफर होता है तो आपको घर खरीदने का फैसला काफी सोच-समझकर लेना चाहिए।
घर के किराए से EMI चुकाना आज मुश्किल है
आज घरों की कीमत जिस तरह से बढ़ी है, उसकी EMI घर के किराए से चुकाना मुश्किल है। अगर आपका ट्रांसफर दूसरे शहर में हो जाता है तो आपको नए शहर में किराए पर रहना होगा। ऐसे में आपको घर की EMI के साथ नए शहर में घर का किराया भी चुकाना होगा। इससे आप पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।