इंडिया में पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग की सुविधा नहीं है। यहां हर इंडिविजुअल टैक्सपेयर के लिए अलग एग्जेम्प्शन और डिडक्शन लिमिट है। शादी के बाद भी पति और पत्नी को बतौर इंडिविजुअल टैक्सेपयर रिटर्न फाइल करना पड़ता है, जबकि भारत में ज्यादातर परिवारों की इनकम, खर्च और फाइनेंशियल प्रायरिटीज में पति और पत्नी की हिस्सेदारी होती है।
वर्तमान टैक्स सिस्टम आज के परिवार की जरूरत के हिसाब से नहीं
Union Budget 2026 पेश होने से पहले पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग की सुविधा भारत में शुरू होने की काफी चर्चा है। कई टैक्सपेयर्स का कहना है कि अभी जो सिस्टम है, वह आज के परिवारों की जरूरतों के हिसाब से नहीं है। अगर सरकार पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग का विकल्प शुरू करती है तो कई परिवारों खासकर उन परिवारों पर टैक्स का बोझ कम हो जाएगा, जिसमें कमाने वाला एक ही सदस्य है।
आईसीएआई ने सरकार को दी है ज्वाइंट टैक्सेशन शुरू करने की सलाह
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने पति और पत्नी के लिए ज्वाइंट टैक्स-फाइलिंग का विकल्प शुरू करने की सलाह सरकार को दी है। यह सिस्टम पहले से अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में है। इन देशों में कई पति और पत्नी इस सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। इससे परिवार की टैक्स लायबिलिटी कम हो जाती है।
ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग सिस्टम से परिवार पर टैक्स का बोझ घटेगा
ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग सिस्टम का फायदा यह है कि परिवार की कंबाइंड इनकम का एसेसमेंट एक अलग टैक्स स्लैब के तहत होता है। इससे उस परिवार की टैक्स लायबिलिटी कम हो जाती है, जिसमें एक सदस्य की कमाई दूसरे सदस्य के मुकाबले काफी ज्यादा होती है। ज्वाइंट रिटर्न फाइलिंग के विकल्प के इस्तेमाल से पति और पत्नी होम लोन, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और दूसरे टैक्स-सेविंग्स इनवेस्टमेंट का ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
आईसीएआई ने अपने प्रस्ताव में क्या-क्या है
आईसीएआई ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि ऐसे पति-पत्नी जिनके पास वैलिड पैन है, उन्हें ज्वाइंट रिटर्न फाइल करने का विकल्प मिलना चाहिए। यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए। यह सिर्फ विकल्प होना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कोई पति-पत्नी अलग-अलग रिटर्न फाइल करना चाहते हैं तो उन्हें इसकी इजाजत होनी चाहिए। ऐसे पति-पत्नी जिन्हें ज्वाइंट फाइलिंग में फायदा नजर आएगा, वे इस विकल्प का इस्तेमाल कर सकेंगे।
बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट दोगुनी करने की सलाह
ICAI ने यह भी कहा है कि ज्वाइंट टैक्सेशन में बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट दोगुन होनी चाहिए। परिवार की कंबाइंड इनकम को ध्यान में रख टैक्स स्लैब तय होने चाहिए। इंस्टटीट्यूट ने जो प्रस्ताव दिया है, उसके मुताबिक, 8 लाख रुपये तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इनकम बढ़ने के साथ-साथ टैक्स स्लैब बढ़ता जाएगा। सबसे ज्यादा 30 फीसदी टैक्स का रेट 48 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर लगेगा।
ज्वाइंट टैक्स फाइलिंग से परिवारों को ऐसे होगा फायदा
अलग-अलग रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में पति और पत्नी में से अगर कोई नहीं कमाता है तो उसकी बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट और लोअर टैक्स स्लैब का इस्तेमाल नहीं होता है। ज्वाइंट फाइलिंग में इसका इस्तेमाल होने लगेगा। इससे इनकम एवरेज हो जाएगी, जिससे परिवार की टैक्स लायबिलिटी कम हो जाएगी। दिनेश आरजव एंड एसोसिएट्स के सीए प्रियल गोएल जैन ने कहा, "ज्वाइंट फाइलिंग से हाउसहोल्ड फाइनेंशियल प्लानिंग को बढ़ावा मिलेगा। इनवेस्टमें स्ट्रक्चर आसान होगा और कम डिडक्शन वाली नई टैक्स रीजीम के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा।"