Buying a house with equity gains: कई निवेशक घर की खरीदारी के लिए पैसों का इंतजाम शेयरों की बिक्री से करते हैं। इसके लिए लॉन्ग टर्म इक्विटी निवेश को भुनाया जाता है। इस स्थिति में निवेशकों को उम्मीदें होती हैं कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 54एफ के तहत टैक्स बेनेफिट हासिल किया जा सकता है और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि इससे जुड़ी कई अहम बातें हैं, जिनका ध्यान रखना जरूरी है ताकि इस सेक्शन से जुड़ा फायदा हासिल किया जा सके। यहां इसे लेकर पहले बताया जा रहा है कि इस सेक्शन से जुड़े अहम सवाल कौन-कौन से हैं और उसे लेकर एक्सपर्ट का क्या कहना है।
Section 54F को लेकर उठने वाले अहम सवाल
अगर अब से मार्च 2026 के आखिरी तक शेयरों की बिक्री की जाए तो क्या इन सभी बिक्री से होने वाले कुल कैपिटल गेन्स को सेक्शन 54F के तहत छूट मिल सकती है, भले ही प्रॉपर्टी की खरीदारी इस महीने ही हो?
यदि घर खरीदने के लिए लोन लिया और मार्च 2026 तक शेयरों की बिक्री से हुए मुनाफे का इस्तेमाल लोन की किश्त यानी ईएमआई भरने में किया जाए तो तो क्या ऐसी स्थिति में भी सेक्शन 54F का फायदा लिया जा सकता है?
क्या इक्विटी शेयर बेचने और घर में निवेश करने पर मिलने वाली धारा 54F की छूट सिर्फ एक बार मिलती है, या फिर ₹10 करोड़ की लिमिट तक कई वर्षों में भी दावा किया जा सकता है?
मुंबई के सीए और सीएफपी बलवंत जैन का कहना है कि सेक्शन 54एफ इंडिविजुअल और एचयूएफ को रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की बिक्री के अलावा किसी भी अन्य कैपिटल एसेट से हुए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर एग्जेम्प्शन मिलता है। हालांकि इस छूट को हासिल करने के लिए जरूरी है कि कैपिटल एसेट की बिक्री से मिले नेट फंड को एक तय समय के भीतर रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने में निवेश किया जाए।
बलवंत जैन का कहना है कि अगर रहने के लिए तैयार घर को खरीदा जाता है तो उसे कैपिटल एसेट की बिक्री की तारीख से दो साल के भीतर इसे हासिल करना जरूरी है। हालांकि यह छूट तब भी मिलेगी, जब कैपिटल एसेट की बिक्री से एक साल पहले खरीदा गया हो। वहीं अगर टैक्सपेयर्स तैयार घर खरीदने की बजाय इसे बनवाता है या अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी खरीदता है तो उसे इसे तैयार करने के लिए तीन साल का समय मिलता है। एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि यह छूट सिर्फ एक ही ट्रांजैक्शन पर ही नहीं मिलेगा बल्कि इसे कई ट्रांजैक्शंस के लिए क्लेम कर सकते हैं लेकिन हर ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी है कि घर खरीदारी को लेकर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स से जुड़ी टाइम लिमिट पूरी हो।
सेक्शन 54F की छूट एक से अधिक वित्तीय वर्षों में और एक से अधिक घरों की खरीदारी के लिए भी ली जा सकती है, लेकिन इसके जरूरी ये है कि जिस तारीख को आप उस कैपिटल एसेट को बेच रहे हैं यानी जिसके लिए छूट का दावा किया जा रहा है, उस तारीख पर आपके पास एक से अधिक घर का मालिकाना हक ना हो।
रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की खरीदारी में इस सेक्शन का फायदा उठाने के लिए जरूरी नहीं है कि जितने पैसे कैपिटल एसेट की बिक्री से मिले, उतना इस्तेमाल ही किया जाए। कानून यही कहता है कि पूरा एग्जेम्प्शन हासिल करने के लिए घर की लागत कम से कम कैपिटल एसेट से नेट सेल वैल्यू के बराबर होनी चाहिए। हालांकि अगर घर में निवेश इस वैल्यू से कम है तो सेक्शन 54एफ के तहत फायदा इसी अनुपात में ही मिलेगा। ऐसे में कानून के मुताबिक अगर घर खरीदने के लिए होम लोन लिया गया है तो भी सेक्शन 54एफ के तहत एग्जेम्प्शन का फायदा ले सकते हैं।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी फैसला लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।