दुबई के प्रॉपर्टी रेट में भारी गिरावट, अगर यहां इन्वेस्टमेंट करना है तो लोन और नियमों के बारे में सब जान लीजिए

Dubai Property Investment Rules: भारतीय निवासी LRS स्कीम के तहत ही विदेश में संपत्ति खरीदने के लिए पैसा भेज सकते हैं। सबसे जरूरी बात ये है कि एक वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम $2,50,000 यानी करीब ₹2 करोड़ तक ही विदेश भेज सकता है

अपडेटेड Apr 23, 2026 पर 4:07 PM
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ईरान-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है

Dubai Property Rules for Indians: दुबई का रियल एस्टेट बाजार हमेशा से भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने मिडिल ईस्ट के प्रॉपर्टी मार्केट में हड़कंप मचा दिया है। युद्ध शुरू होने के बाद से प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। ऐसे में कई लोगों के लिए एक मौका जैसा है। वैसे विदेश में संपत्ति खरीदना जितना आकर्षक लगता है, उसके नियम उतने ही सख्त होते है। अगर आप भी दुबई में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको FEMA और RBI के नियमों की बारीक जानकारी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कानूनी पचड़ों और भारी जुर्माने से बचा जा सके।

क्या है LRS स्कीम?

भारतीय निवासी Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत ही विदेश में संपत्ति खरीदने के लिए पैसा भेज सकते हैं। एक वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति अधिकतम $2,50,000 यानी करीब ₹2 करोड़ तक विदेश भेज सकता है। अगर संपत्ति संयुक्त रूप से खरीदी जा रही है, तो परिवार के सदस्य अपनी व्यक्तिगत सीमा को एक साथ जोड़ सकते हैं। जैसे- पति-पत्नी मिलकर ₹2 करोड़ तक भेज सकते हैं, बशर्ते दोनों संपत्ति के मालिक हों।


LRS स्कीम की सबसे जरूरी बात ये है कि, इसकी सुविधा केवल व्यक्तिगत निवेशकों के लिए है। कंपनियां, पार्टनरशिप फर्म, ट्रस्ट या HUF इस स्कीम के तहत विदेश में घर नहीं खरीद सकते।

क्या लोन पर खरीद सकते है प्रॉपर्टी?

दुबई में घर खरीदने के लिए फाइनेंसिंग को लेकर नियम सबसे ज्यादा पेचीदा हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय निवासी आमतौर पर दुबई के बैंकों या वहां के डेवलपर्स से लोन लेकर प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते। FEMA के नियमों के तहत, संपत्ति का भुगतान मुख्य रूप से भारत से भेजे गए LRS फंड से ही होना चाहिए। भारत के बैंक भी आम तौर पर विदेशी संपत्ति खरीदने के लिए होम लोन नहीं देते हैं। इसलिए, निवेशक को अपने खुद के फंड या टैक्स-पेड बचत पर निर्भर रहना पड़ता है।

कमाई छिपाना पड़ेगा महंगा

सिर्फ पैसा भेजना ही काफी नहीं है, आपको भारतीय आयकर विभाग को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी:

ITR में जानकारी: आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में विदेशी संपत्ति का पूरा विवरण देना अनिवार्य है।

कमाई पर टैक्स: अगर आप उस प्रॉपर्टी को किराए पर देते हैं या उसे बेचकर मुनाफा कमाते हैं, तो उस कमाई को भारत में घोषित करना होगा और उस पर नियमानुसार टैक्स देना होगा।

ब्लैक मनी एक्ट: विदेशी संपत्ति की जानकारी छिपाना 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत गंभीर अपराध माना जा सकता है।

नियमों की अनदेखी करने पर क्या होगा?

नियमों की अनदेखी करने पर ED की जांच और भारी जुर्माना लग सकता है। अगर लेनदेन FEMA के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, तो ट्रांसफर की गई राशि पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। सबसे जरूरी बात ये है कि, सारा पैसा केवल अधिकृत बैंक के जरिए और सही 'पर्पज कोड' के साथ ही भेजा जाना चाहिए।

एक्सपर्ट्स की क्या है सलाह

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई में निवेश करने से पहले फंड के स्रोत का स्पष्ट होना और टैक्स-पेड होना अनिवार्य है। निवेश से पहले किसी प्रोफेशनल सलाहकार से स्ट्रक्चरिंग की समीक्षा जरूर करवाएं ताकि आपकी मेहनत की कमाई कानूनी पेचीदगियों में न फंसे।

डिस्क्लेमरः Moneycontrol पर एक्सपर्ट्स/ब्रोकरेज फर्म्स की ओर से दिए जाने वाले विचार और निवेश सलाह उनके अपने होते हैं, न कि वेबसाइट और उसके मैनेजमेंट के। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। Moneycontrol यूजर्स को सलाह देता है कि वह कोई भी निवेश निर्णय लेने के पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह लें।

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