महाराष्ट्र के नागपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां 90 साल के बुजुर्ग को लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी गलत तरीके से बेची गई। केनरा बैंक के कर्मचारियों ने 2 लाख सालाना प्रीमियम वाली पॉलिसी 90 साल के बुजुर्ग को बेची जबकि उन्हें पैसे कि दिक्कत थी। पॉलिसी का मैच्योरिटी साल 2126 थी जो उनकी उम्र के हिसाब से गलत थी। पहला उन पर इंश्योरेंस खरीदने का दबाव बनाया गया और फिर पॉलिसी का फॉर्म भी बैंक के कर्मचारियों ने भरा। यह पॉलिसी Canara Bank की एक शाखा के जरिए बेची गई। इस मामले ने बैंकिंग और इंश्योरेंस सेक्टर में सीनियर सिटीजन्स की सेफ्टी को लेकर सवाल खड़े कर दिये हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आया मामला
यह आरोप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यूजर साकेत आर ने उठाया। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग ग्राहक वेंकटचलम वी अय्यर उनकी पत्नी के नाना हैं। अय्यर पिछले कई दशकों से उसी कैनरा बैंक शाखा में बैंकिंग कर रहे हैं। पोस्ट के मुताबिक पॉलिसी फरवरी पिछले साल फाइनल की गई थी और 2 लाख रुपये उनके सेविंग अकाउंट से कट भी चुके थे।
अगली किश्त के अलर्ट से खुला मामला
मामला तब सामने आया जब बुजुर्ग को अगले प्रीमियम का मैसेज मिला। वह घबरा गए और परिवार को जानकारी दी। इसके बाद पता चला कि पॉलिसी का प्रीमियम हर साल 2 लाख रुपये है। आरोप है कि दो साल में कुल 4 लाख रुपये कट चुके हैं, जो उनकी जीवनभर की सेविंग का बड़ा हिस्सा है।
भरोसे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप
परिवार का कहना है कि अय्यर ने बैंक मैनेजर पर पूरा भरोसा किया था। उम्र ज्यादा होने और सीमित फाइनेंशियल समझ के कारण वह पॉलिसी की शर्तें ठीक से नहीं समझ पाए। आरोप है कि पॉलिसी को बहुत जरूरी और अर्जेंट बताकर दबाव बनाया गया। इससे बुजुर्ग ने बिना सवाल किए हामी भर दी।
उम्र के नियमों को दरकिनार करने का दावा
साकेत ने आरोप लगाया कि पॉलिसी उम्र से जुड़े नियमों को बायपास करके जारी की गई। उनके मुताबिक बैंक मैनेजर ने पहले अय्यर से उम्र का हवाला देकर बेटी के साथ जॉइंट अकाउंट खुलवाया। बाद में बेटी को लाइफ एश्योर्ड दिखाया गया, जबकि प्रीमियम का पैसा अय्यर के अकाउंट से काटा गया। यह भी आरोप है कि बुजुर्ग डॉक्यूमेंट खुद भरने की स्थिति में नहीं थे और बैंक ने ही फॉर्म भरवाए।
2124 में मैच्योर होने वाली पॉलिसी पर सवाल
सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर दिखी कि पॉलिसी की मैच्योरिटी 2124 बताई जा रही है। यानी पॉलिसी पूरी होने की तारीख उस उम्र से कहीं आगे की है, जहां पहुंचना असंभव है। कई यूजर्स ने इसे साफ तौर पर मिस-सेलिंग बताया।
शिकायत और रेगुलेटरी कार्रवाई की मांग
कई लोगों ने सलाह दी कि अगर बैंक और इंश्योरेंस कंपनी समाधान नहीं देती, तो मामला Reserve Bank of India और Insurance Regulatory and Development Authority of India तक ले जाया जाए। नियमों के मुताबिक 30 दिन में समाधान न होने पर रेगुलेटर के पास शिकायत की जा सकती है।
सोशल मीडिया पर जवाब देते हुए कैनरा बैंक ने कहा कि उन्हें असुविधा के लिए खेद है और मामला संबंधित टीम को भेजा जा रहा है। हालांकि, बैंक ने आरोपों के मुद्दे पर पब्लिक लेवल पर कोई साफ जवाब नहीं दिया है।