CGHS rules update: क्या सास-ससुर को भी मेडिकल बेनेफिट के लिए चुन सकते हैं कर्मचारी? सरकार ने स्पष्ट किया नियम
CGHS rules update: क्या केंद्र सरकार के कर्मचारी अपने माता पिता और सास ससुर दोनों को CGHS में शामिल कर सकते हैं? स्वास्थ्य मंत्रालय ने अब इस पर बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि इस बारे में एक ही बार फैसला लिया जा सकता है, जिसे बाद में बदला नहीं जा सकेगा।
CGHS नियमों के मुताबिक परिवार में पति या पत्नी के अलावा दूसरे पात्र डिपेंडेंट सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।
CGHS rules update: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि पुरुष सरकारी कर्मचारी CGHS यानी सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम और सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944 के तहत मेडिकल सुविधाओं के लिए माता पिता या सास ससुर में से किसी एक पक्ष को ही डिपेंडेंट के तौर पर चुन सकते हैं। सबसे अहम बात यह है कि यह विकल्प सिर्फ एक बार मिलेगा। बाद में इसे बदला नहीं जा सकेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्या कहा
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 13 मई 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (OM) में कहा कि यह सुविधा CGHS और CS(MA) रूल्स दोनों के तहत पात्र कर्मचारियों को मिलेगी। हालांकि इसके लिए डिपेंडेंसी और पात्रता की शर्तें लागू रहेंगी।
मंत्रालय ने साफ कहा, 'पुरुष सरकारी कर्मचारी अपने माता पिता या सास ससुर में से किसी एक को डिपेंडेंट फैमिली मेंबर के तौर पर चुनने के लिए सिर्फ एक बार विकल्प इस्तेमाल कर सकेंगे।'
बाद में फैसला बदलने की अनुमति नहीं
मंत्रालय ने यह भी साफ कर दिया है कि एक बार विकल्प चुनने के बाद उसे बदला नहीं जा सकेगा। यानी अगर किसी कर्मचारी ने शुरुआत में अपने माता पिता को डिपेंडेंट चुना, तो बाद में वह सास ससुर को शामिल नहीं कर सकेगा। यह नियम तब भी लागू रहेगा, अगर माता पिता की मृत्यु हो जाए या बाद में परिस्थितियां बदल जाएं।
OM में कहा गया है कि माता पिता के पक्ष में विकल्प चुनने के बाद कर्मचारी बाद में सास ससुर को डिपेंडेंट के तौर पर नहीं जोड़ सकेगा। यही नियम दूसरी स्थिति में भी लागू होगा। अगर शुरुआत में सास ससुर को चुना गया, तो बाद में माता पिता को शामिल करने की अनुमति नहीं मिलेगी।
यह सुविधा पहले से मौजूद थी
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि CGHS के तहत माता पिता या सास ससुर में से किसी एक को चुनने की सुविधा पहले से दी जा रही थी।
इसके लिए 26 जुलाई 2023 को एक OM जारी किया गया था। बाद में 28 मार्च 2024 के आदेश के जरिए यही सुविधा Central Services (Medical Attendance) Rules, 1944 के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी दे दी गई थी। सरकार का कहना है कि नया OM सिर्फ नियमों को लेकर स्थिति साफ करने के लिए जारी किया गया है।
CGHS में परिवार की परिभाषा
CGHS नियमों के मुताबिक परिवार में पति या पत्नी के अलावा दूसरे पात्र डिपेंडेंट सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।
इनमें माता पिता या सास ससुर, बहनें, विधवा बहनें, विधवा बेटियां, नाबालिग भाई बहन, बच्चे और सौतेले बच्चे शामिल हैं, जो पूरी तरह सरकारी कर्मचारी पर निर्भर हों और सामान्य तौर पर उनके साथ रहते हों। इसके अलावा तलाकशुदा या अलग रह रही डिपेंडेंट बेटियां और उनके नाबालिग बच्चे भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
बच्चों के लिए क्या नियम हैं
CGHS के तहत बेटों को आमतौर पर 25 साल की उम्र या शादी तक, जो पहले हो, पात्र माना जाता है। अगर बेटा शारीरिक या मानसिक दिव्यांगता की वजह से खुद कमाने में सक्षम नहीं है और पूरी तरह कर्मचारी पर निर्भर है, तो कुछ मामलों में उम्र सीमा के बाद भी सुविधा जारी रह सकती है।
वहीं बेटियों को शादी तक पात्र माना जाता है। तलाकशुदा, अलग रह रही या विधवा बेटियां भी अगर आर्थिक रूप से कर्मचारी पर निर्भर हैं, तो CGHS में शामिल की जा सकती हैं। उनके नाबालिग बच्चों को भी डिपेंडेंट माना जा सकता है।
किसे माना जाएगा डिपेंडेंट
CGHS नियमों के मुताबिक ऐसा परिवार सदस्य, जिसकी कुल मासिक आय सभी स्रोतों से मिलाकर ₹9,000 और महंगाई भत्ते (DA) से कम हो, उसे डिपेंडेंट माना जाएगा। इसमें पेंशन और डेथ कम रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) के बराबर मिलने वाली रकम भी शामिल होगी।
हालांकि CGHS कार्ड होल्डर के पति या पत्नी पर यह आय सीमा लागू नहीं होगी। यानी फैमिली पेंशन मिलने के बावजूद पति या पत्नी पात्र बने रहेंगे।
मंत्रालयों को क्या निर्देश दिए गए
स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों को यह स्पष्टीकरण संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि CGHS के तहत माता पिता और सास ससुर में से किसी एक को चुनने का फैसला बाद में बदला नहीं जा सकेगा।