Gold vs Silver jewellery: बदल रहा है ज्वेलरी बाजार! जानिए सोने-चांदी के गहने और स्टाइल के बारे में क्या सोच रही नई पीढ़ी
Gold vs Silver jewellery: भारत का ज्वेलरी बाजार नई पीढ़ी की सोच के साथ बदल रहा है। सोना निवेश और परंपरा का प्रतीक बना है, जबकि चांदी डिजाइन और बजट के कारण लोकप्रिय हो रही है। डिजिटल खोज और स्टाइलिंग भी खरीद निर्णय में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जानिए डिटेल।
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भारत का ज्वेलरी बाजार सिर्फ सोने से चांदी की ओर या भारी से हल्के डिजाइन की ओर नहीं जा रहा है। रिटेलर्स का कहना है कि ग्राहकों की पसंद अब अलग-अलग दिशाओं में बंट रही है। यह बदलाव डिजाइन की समझ, कीमत को लेकर सतर्कता, बदलती लाइफस्टाइल और डिजिटल असर से तय हो रहा है।
ब्रांड्स का कहना है कि अब ग्राहक किसी एक बड़े ट्रेंड को आंख बंद करके नहीं अपनाते। खासकर, नई पीढ़ी के खरीदार। वे धातु और डिजाइन का चुनाव सोच समझकर कर रहे हैं।
रंगीन रत्नों में सोना या चांदी?
रंगीन रत्नों वाली ज्वेलरी में चांदी सोने की जगह ले रही है या नहीं, यह पूरी तरह ग्राहक वर्ग पर निर्भर करता है। Dhirsons Jewellers की क्रिएटिव डायरेक्टर रीवा धीर के मुताबिक, रंगीन रत्नों के लिए ग्राहक अब भी सोना पसंद करते हैं। वजह है उसकी चमक और वैल्यू। पारंपरिक बाजार में सोना अब भी भरोसे की धातु है।
वहीं PNG Jewellers के वाइस प्रेसिडेंट सेल्स सुरेश कृष्णन का कहना है कि खासकर युवा ग्राहकों के बीच चांदी की मांग बढ़ रही है। जहां सोने की कीमत बजट से बाहर चली जाती है, वहां चांदी विकल्प बन रही है। CaratLane के मैनेजिंग डायरेक्टर सौमेन भौमिक के मुताबिक, चांदी ग्राहकों को प्रयोग करने की आजादी देती है। कम कीमत में आधुनिक और स्टाइलिश डिजाइन अपनाए जा सकते हैं।
कारीगरी और स्टोन सेटिंग का स्तर
अब खरीदारी के मामले में बाजार दो हिस्सों में बंटा दिख रहा है। जहां मूल्य और निवेश सोच वाले ग्राहक सोना चुन रहे हैं, वहीं डिजाइन और बजट के लिहाज से चांदी की पकड़ मजबूत हो रही है।
सौमेन भौमिक का कहना है कि कारीगरी और स्टोन सेटिंग का स्तर दोनों धातुओं में समान रहता है, लेकिन कीमत की संरचना अलग होती है। चांदी कम एंट्री प्राइस देती है, जबकि सोना अपनी कीमत के कारण भारी पड़ता है। इसलिए आज धातु का चुनाव सिर्फ ग्राहक की पसंद नहीं, बल्कि कंपनियों की वित्तीय रणनीति से भी जुड़ा है।
ऑनलाइन खोज, स्टोर में अंतिम फैसला
खरीदारी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। CaratLane के मुताबिक उनकी लगभग 70 प्रतिशत खरीद डिजिटल रूप से प्रभावित होती है। ग्राहक पहले ऑनलाइन डिजाइन देखते और शॉर्टलिस्ट करते हैं, फिर 366 स्टोर्स में से किसी एक में जाकर अंतिम फैसला लेते हैं। ऑफलाइन खरीद में औसत बिल ज्यादा होता है।
Kumari Fine Jewellery की फाउंडर सुप्रिया कटारिया के अनुसार, ग्राहक अब स्टोर में आने से पहले ही अपनी पसंद और बजट तय कर लेते हैं। स्टोर में आकर वे सिर्फ फिनिश और फिट को परखते हैं।
स्टाइलिंग की बढ़ती भूमिका
ज्वेलरी स्टाइलिंग अब अतिरिक्त सेवा नहीं, बल्कि अहम सलाह बनती जा रही है। रीवा धीर के मुताबिक, ब्राइडल सेगमेंट में स्टाइलिंग बेहद खास भूमिका निभाती है। यहां दुल्हन की पसंद और लुक के मुताबिक चयन किया जाता है।
सुरेश कृष्णन का कहना है कि लग्जरी सेगमेंट में स्टाइलिंग ग्राहक जुड़ाव का जरिया है, जबकि मास सेगमेंट में यह मार्केटिंग टूल की तरह काम करती है। सुप्रिया कटारिया के अनुसार, उनके ब्रांड में स्टाइलिंग मुख्य भूमिका में है, जहां ग्राहकों को भारतीय और पश्चिमी दोनों तरह के परिधानों के साथ ज्वेलरी मैच कराने में मदद दी जाती है।
हल्के डिजाइन की मांग
बदलती लाइफस्टाइल ने खासकर सोने की ज्वेलरी में डिजाइन की मांग बदली है। सुप्रिया कटारिया के मुताबिक, काम, यात्रा और सामाजिक जीवन के बीच तालमेल बिठाने वाले बहुउपयोगी डिजाइन की मांग बढ़ रही है। सौमेन भौमिक ने भी हल्के और स्टैकेबल डिजाइन की ओर रुझान की बात कही, जिसमें सोने की ऊंची कीमत का असर है।
फिर भी अवसर विशेष ज्वेलरी की मांग बनी हुई है। रिवा धीर के अनुसार, पारंपरिक और भारी डिजाइन में दिलचस्पी कायम है। सुरेश कृष्णन ने बताया कि सोने में किफायत के कारण हल्के डिजाइन लोकप्रिय हो रहे हैं। वहीं, शादी जैसे मौकों पर गोल्ड फिनिश वाली भारी चांदी की ज्वेलरी भी खरीदी जा रही है, ताकि कम लागत में ज्यादा प्रभाव मिल सके।
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