ग्रामीण और शहरी भारत के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को समर्थन देने के लिए 'पीएम विश्वकर्मा (Vishwakarma Scheme)' योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। इस योजना के जरिए सरकार कामगारों को एक लाख रुपये तक का लोन उपलब्ध कराएगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 'विश्वकर्मा योजना' को मंजूरी प्रदान कर दी। इस योजना के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कौशल कार्यों को बढ़ाने वाले कामगारों का कौशल विकास किया जाएगा। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 30 लाख परिवारों को सहायता मिलेगी।
1 परिवार से 1 व्यक्ति को मिलेगी सहायता
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्ण ने बैठक के बाद पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। 1 परिवार से 1 व्यक्ति को यह सहायता मिलेगी। मंत्री ने बताया कि गांवों के कॉमन सर्विस सेंटर में रजिस्ट्रेशन होगा और 3 स्तरों पर फाइनल चयन होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों की मदद जरूरी होगी, लेकिन सारा खर्च केंद्र सरकार उठाएगी।
वैष्णव ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फेंस में बताया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पारंपरिक कौशल वाले लोगों का समर्थन करने के लिए 'प्रधानमंत्री विश्वकर्मा' योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत उदार शर्तों पर 1 लाख रुपए तक का लोन उपलब्ध कराया जाएगा।"
30 लाख पारंपरिक कारीगरों को होगा लाभ
यह योजना 13 हजार करोड़ रूपये की है और इससे 30 लाख पारंपरिक कारीगरों को लाभ होगा। वैष्णव ने बताया कि छोटे-छोटे कस्बों में अनेक वर्ग ऐसे हैं जो गुरु-शिष्य परंपरा के तहत कौशल से जुड़े कार्यों में लगे हैं। इनमें लोहार, कुम्हार, राज मिस्त्री, धोबी, फूल का काम करने वाले, मछली का जाल बुनने वाले, ताला-चाबी बनाने वाले, मूर्तिकार आदि शामिल हैं।
वैष्णव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इन वर्गों का महत्वपूर्ण स्थान है। इन्हें नया आयाम देते हुए मंत्रिमंडल ने विश्वकर्मा योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से इस योजना का संकेत दिया था।
उपकरणों की खरीद में भी सरकार करेगी मदद
केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताया कि इसमें इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि इन वर्गों का किस तरह से अधिक कौशल विकास हो तथा नए प्रकार के उपकरणों एवं डिजाइन की जानकारी मिले। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उपकरणों की खरीद में भी मदद की जाएगी। इसके तहत दो प्रकार का कौशल विकास कार्यक्रम होगा जिसमें पहला 'बेसिक' और दूसरा 'एडवांस' होगा। इस कोर्स को करने वालों को मानदेय (स्टाइपंड) भी मिलेगा। मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत प्रथम चरण में एक लाख रूपये का तक कर्ज दिया जाएगा जिस पर रियायती ब्याज (अधिकतम 5 फीसदी) देय होगा।
पीएम मोदी ने किया था ऐलान
प्रधानमंत्री मोदी ने मंलगवार को कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कई समुदायों को नई ताकत देने के लिए अगले महीने विश्वकर्मा जयंती के मौके पर 'विश्वकर्मा योजना' शुरू की जाएगी। उन्होंने 77वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह योजना भारत के लाखों व्यवसाइयों और कारीगरों के उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
प्रधानमंत्री ने कुछ पेशेवर कामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन कार्यों में लगे ज्यादातर लोग OBC समुदाय से हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इन लोगों को नई ताकत देने के लिए, आने वाली विश्वकर्मा जयंती पर करीब 13-15 हजार करोड़ रुपये से विश्वकर्मा योजना शुरू की जाएगी।
यह योजना अगले महीने यानी सितंबर में विश्वकर्मा जयंती पर शुरू की जाएगी। विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2023 को है। विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष तौर पर औजार, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों, मोटर गैराज, वर्कशॉप, लेथ यूनिट, कुटीर एवं लघु इकाईयों आदि की पूजा की जाती है। इसके पीछे मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के अस्त्र, भवन, स्वर्ग लोग, पुष्पक विमान का निर्माण किया था।