हर एक नौकरीपेशा व्यक्ति का पीएफ अकाउंट (PF Account) खुलवाया जाता है। इसमें कर्मचारियों की मंथली सैलरी का एक हिस्सा जमा होता है। जितना हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी से काटा जाता है उतना ही हिस्सा कंपनी या फिर ऑफिस की तरफ से भी जमा किया जाता है। हालांकि अगर कोई भी ऑफिस या फिर कंपनी कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में पीएफ कंट्रीब्यूशन नहीं करता है तो उस पर सख्त ऐक्शन भी लिया जाएगा। ईपीएफओ की गाइडलाइन के मुताबिक हर महीने के लिए ऑफिस को कर्मचारियों के खाते में महीने की 15 तारीख तक ईपीएफ की रकम का भुगतान जमा करना होगा। अगर कोई भी नियोक्ता जुर्माने और ब्याज के भुगतान से बचना चाहता है तो उसे यह तय करना चाहिए कि ईपीएफ का भुगतान वक्त पर कर दिया जाए।
कोर्ट भी दे चुकी है फैसला
फरवरी 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा था कि अगर कोई कर्मचारियों के ईपीएफ कंट्रीब्यूशन में देरी होती है तो फिर ऑफिस की तरफ से नुकसान का कवर किया जाना जरूरी है। ईपीएफो के मुताबिक कंट्रीब्यूशन में चूक या देरी करने पर ऑफिस को दी जाने वाली रकम पर हर्जाना और इंटरेस्ट का भुगतान भी करना होगा। इसके अलावा ईपीएफओ की तरफ से उस इंटरेस्ट रेट के बारे में भी बताया गया है जिस पर कंट्रीब्यूशन में देरी की वजह से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है।
2 महीने की देरी होने पर इंटरेस्ट रेट 5 फीसदी है। वहीं 2-4 महीने की देरी पर 10 फीसदी, 4 से 6 महीने की देरी पर 15 फीसदी और 6 महीने से ज्यादा की देरी होने पर 25 फीसदी इंटरेस्ट रेट लगाया जाता है। देरी की पूरी अवधि के लिए देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया जाता है। इसके अलावा अगर कंट्रीब्यूशन में देरी होती है तो इंप्लॉइज इसके खिलाफ ईपीएफओ के पास शिकायत भी कर सकते हैं। ईपीएफओ की तरफ से इस पूरे मामले पर जांच भी किए जाने का प्रावधान है। आप ईपीएफो पोर्टल या फिर एसएमएस या फिर मिस्ड कॉल के जरिए जान सकते हैं कि आपके अकाउंट में कंट्रीब्यूशन किया गया है या नहीं।