हर एक नौकरीपेशा व्यक्ति का पीएफ अकाउंट (PF Account) खुलवाया जाता है। इसमें कर्मचारियों की मंथली सैलरी का एक हिस्सा जमा होता है। जितना हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी से काटा जाता है उतना ही हिस्सा कंपनी या फिर ऑफिस की तरफ से भी जमा किया जाता है। हालांकि अगर कोई भी ऑफिस या फिर कंपनी कर्मचारी के पीएफ अकाउंट में पीएफ कंट्रीब्यूशन नहीं करता है तो उस पर सख्त ऐक्शन भी लिया जाएगा। ईपीएफओ की गाइडलाइन के मुताबिक हर महीने के लिए ऑफिस को कर्मचारियों के खाते में महीने की 15 तारीख तक ईपीएफ की रकम का भुगतान जमा करना होगा। अगर कोई भी नियोक्ता जुर्माने और ब्याज के भुगतान से बचना चाहता है तो उसे यह तय करना चाहिए कि ईपीएफ का भुगतान वक्त पर कर दिया जाए।
