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देश में 2025 तक मिनिमम वेज की जगह लिविंग वेज का सिस्टम लागू होगा, जानिए क्या है इसका मतलब

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन ने मिनिमम वेज की जगह लिविंग वेज का कॉनसेप्ट पेश किया था। इस साल फरवरी में इस पर सहमति बनी थी। इंडिया में अभी मिनिमम वेज का सिस्टम लागू है। सरकार ने इसकी वजह लिविंग वेज लागू करने में आईएलओ की मदद मांगी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 26, 2024 पर 1:48 PM
देश में 2025 तक मिनिमम वेज की जगह लिविंग वेज का सिस्टम लागू होगा, जानिए क्या है इसका मतलब
सरकार ने 2019 में वेजेज का नया कानून 2019 में पारित कर दिया था। लेकिन, अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।

देश में अगले साल मिनिमम वेज (Minimum Wage) की जगह लिविंग वेज (Living Wage) लागू हो सकता है। सरकार ने इस बारे में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) से तकनीकी मदद मांगी है। लिविंग वेज का अनुमान लगाने और इसे लागू करने के लिए एक फ्रेमवर्क की जरूरत पड़ेगी। इस महीने की शुरुआत में ILO ने लिविंग वेज का कॉनसेप्ट पेश किया था। इससे पहले मिनिमम वेज की जगह लिविंग वेज को लागू करने के एग्रीमेंट पर सहमति बनी थी। यह सहमति फरवरी में बनी थी, जब वेज पॉलिसीज पर एक्सपर्ट्स की एक मीटिंग हुई थी। ILO की गवर्निंग बॉडी ने 13 मार्च को अपने सेशन में इस पर मुहर लगा दी थी। एक सीनियर अफसर ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि एक साल के अंदर मिनिमम वेज की व्यवस्था बदल जाएगी।

इंडिया में काम करने वाले करीब 50 करोड़ लोग

इंडिया में 50 करोड़ से ज्यादा वर्कर्स हैं। इसमें से 90 फीसदी असंगठित क्षेत्र में हैं। इनमें से कई को रोजाना 176 रुपये या इससे ज्यादा मजदूरी मिलती है। यह अमाउंट इस पर निर्भर करता है कि व्यक्ति किस राज्य में है। 2017 से नेशनल वेज की न्यूनतम सीमा में बदलाव नहीं हुआ है। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मिनिमम वेज लागू है। इंडिया 1922 से ILO की गवर्निंग बॉडी का स्थायी सदस्य है। यह आईएलओ का फाउंडिंग मेंबर भी है।

वेजेज का नया कानून अभी लागू नहीं

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