आमतौर पर किसी भी तरह के सरकारी या प्राइवेट सेक्टर में काम निपटाने के लिए हमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड और पासपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है। इन डॉक्यूमेंट्स को हमारे पहचान पत्र के अलावा एड्रेस प्रूफ के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कई लोगों के मन में यह सवाल है कि मृत्यु के बाद इन डॉक्यूमेंट्स का क्या होता है? क्या ये अपने आप ही रद्द हो जाते हैं या परिजनों को इसे रद्द कराना होता है? आइए आपको बताते हैं
इनकम टैक्स भरने के लिए और कई फाइनेंशियल सुविधाओं का लाभ उठाने कि लिए पैन कार्ड का होना जरूरी है। यह आपके अकाउंट से लिंक होता है। लिहाजा किसी व्यक्ति की मौत होने पर उसके परिवार को इनकम टैक्स विभाग में संपर्क कर पैन कार्ड को सरेंडर कर देना चाहिए। लेकिन सरेंडर करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि मृतक के सभी अकाउंट बंद हो चुके हैं।
पासपोर्ट (Passport) एक्ट के तहत जब कोई पासपोर्ट एक बार बन जाता तो उसे पासपोर्ट होल्डर्स की मौत होने पर रद्द नहीं करवाया जा सकता। जब उसकी वैलिडिटी खत्म हो जाएगी। वो अपने आप अमान्य हो जाता है। ऐसे में कोई ठग उस पासपोर्ट का मिसयूज न कर ले। इससे बचने के लिए जिसकी मौत हुई है। उसके पासपोर्ट को सुरक्षित तरीके से अपने पास रख लेना चाहिए।
कई बार जालसाज आधार कार्ड से जरूरी जानकारी चुराकर फ्रॉड करते हैं। ऐसे में मृतक के आधार कार्ड का गलत उपयोग न हो। ये देखना मृतक के परिजनों की जिम्मेदारी होती है। आधार से जुड़ी सेवाएं देखने वाली अथॉरिटी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पास मृतक के आधार कार्ड को रद्द कराने की कोई प्रक्रिया नहीं है। लेकिन यदि मृतक ने कोई सरकारी योजना ली हुई थी तो वह अवश्य ही आधार से लिंक भी होगी। ऐसी स्थिति में परिजनों को इसकी जानकारी संबंधित विभाग को देनी होती है। मृतक के आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए इसे UIDAI वेबसाइट के माध्यम से लॉक कराया जा सकता है।
वोटर आईडी के जरिए वोट डालने का मौका मिलता है। लेकिन किसी की मृत्यु हो जाने के बाद उसके वोटर आईडी कार्ड को आप रद्द करवा सकते हैं। इसके लिए आपको चुनाव कार्यालय में जाकर फॉर्म-7 भरना होगा। जिसके बाद ये कार्ड रद्द हो जाएगा। वोटर आईडी को रद्द करवाने के लिए मृतक के डेथ सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ सकती है।