त्योहारों के बीच प्याज की कीमत (Onion Price) लोगों के आंसू निकालने लगी है। दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में प्याज की खुदरा कीमत 70 रुपये प्रति किलो तक पर पहुंच गई है। आने वाले सप्ताह में इसके 100 रुपये प्रति किलो के भाव पर पहुंच जाने का अनुमान है। नवरात्रि के बाद से प्याज की कीमत बढ़ी है और इसमें उछाल दिसंबर तक जारी रहने की संभावना है। इससे ग्राहकों के साथ-साथ बिक्री करने वालों की भी चिंता बढ़ गई है। केवल दिल्ली एनसीआर में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र में भी प्याज की कीमत बढ़ी है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के यशवंतपुर में एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) प्याज की बिक्री 65-70 रुपये प्रति किलो पर कर रही है।
न्यूज एजेंसी ANI के एक ट्वीट के मुताबिक, गाजीपुर सब्जी मंडी के एक प्याज विक्रेता का कहना है, 'प्याज की आमद कम है जिसके चलते कीमतें ऊंची हैं। आज 28 अक्टूबर को दरें 350 रुपये प्रति 5 किलोग्राम पर हैं। 27 अक्टूबर को ये 300 रुपये प्रति 5 किलो पर थीं। उससे पहले 200 रुपये थीं। एक सप्ताह पहले दरें 200 रुपये, 160 रुपये या 250 रुपये थीं। पिछले सप्ताह में दरें बढ़ी हैं। आपूर्ति में कमी के कारण कीमतों में इजाफा है।'
‘बफर स्टॉक’ से प्याज की बिक्री बढ़ाएगी सरकार
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, प्याज की उच्च कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 27 अक्टूबर को खुदरा बाजारों में 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर ‘बफर स्टॉक’ से प्याज की बिक्री बढ़ाने का फैसला किया। उपभोक्ता मामलों के सचिव रोहित कुमार सिंह ने कहा कि सरकार अगस्त के मध्य से ‘बफर स्टॉक’ से प्याज दे रही है। कीमतों में और वृद्धि को रोकने और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुदरा बिक्री को बढ़ाया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, जिन राज्यों में कीमतों में तेज वृद्धि हो रही है, वहां थोक और खुदरा दोनों बाजारों में ‘बफर स्टॉक’ से प्याज दी जा रही है। अगस्त के मध्य से 22 राज्यों में विभिन्न स्थानों पर ‘बफर स्टॉक’ से करीब 1.7 लाख टन प्याज दी गई है।
खुदरा बाजारों में ‘बफर स्टॉक’ के प्याज को दो सहकारी निकायों भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ (NCCF) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (NAFED) की दुकानों और वाहनों के जरिए 25 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जा रहा है। दिल्ली में भी ‘बफर स्टॉक’ की प्याज को इसी रियायती दर पर बेचा जा रहा है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मौसम संबंधी कारणों से खरीफ प्याज की बुआई में देरी के कारण कम फसल हुई और फसल की आवक में दरी हुई। ताजा खरीफ प्याज की आवक अब तक शुरू हो जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्टॉक में मौजूद रबी प्याज खत्म होने और खरीफ प्याज के आगमन में देरी के कारण आपूर्ति की स्थिति खराब है। इसके चलते थोक और खुदरा दोनों बाजारों में कीमतें बढ़ रही हैं।
सरकार ने FY24 में बफर स्टॉक किया दोगुना
सरकार ने चालू वर्ष 2023-24 में प्याज के लिए ‘बफर स्टॉक’ को दोगुना किया है। इससे घरेलू उपलब्धता में सुधार होगा और आने वाले दिनों में बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगेगा। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने NCCF और NAFED के जरिए पांच लाख टन का ‘बफर स्टॉक’ बनाए रखा है और आने वाले दिनों में अतिरिक्त दो लाख टन प्याज खरीदने की योजना है।