UP Rental Housing Policy: उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों यानी वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और जरूरत के मुताबिक किराए के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। यूपी सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए 'रेंटल हाउसिंग पॉलिसी' तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति प्रदेश में बुजुर्गों के लिए किराए के आवास की जरूरतों का अध्ययन करेगी। इसके बाद योगी सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, समिति की अध्यक्षता आवास विभाग के सचिव करेंगे। समिति में प्रदेश के प्रमुख शहरों की विकास प्राधिकरणों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
लखनऊ समेत पांच बड़े शहरों के अधिकारी समिति में शामिल
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष सदस्य के तौर पर शामिल किए गए हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (आवास विकास परिषद), नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग और आवास बंधु के प्रतिनिधि तथा वरिष्ठ अधिकारी भी समिति का हिस्सा होंगे। समिति का मुख्य काम वरिष्ठ नागरिकों की आवास संबंधी जरूरतों का अध्ययन करना और ऐसी नीति का खाका तैयार करना होगा, जिसके जरिए बुजुर्गों को उनकी जरूरत के अनुसार किराए पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।
अकेले रहने वाले बुजुर्गों को सबसे ज्यादा फायदा
सरकार की प्रस्तावित नीति का सबसे बड़ा फायदा उन बुजुर्गोे को मिलने की उम्मीद है जो अकेले रहते हैं। उनके साथ उनका परिवार, रिश्तेदार या समुदाय का नियमित सहयोग नहीं है। ऐसे बुजुर्गों के लिए अपना घर खरीदना हमेशा संभव या जरूरी नहीं होता। कई वरिष्ठ नागरिक परिवार के साथ रहने के बजाय स्वतंत्र रूप से रहना पसंद करते हैं।
लेकिन उन्हें सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की जरूरत होती है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष रूप से तैयार किराए के आवास उन्हें बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकते हैं। इससे उन्हें घर खरीदने की बड़ी आर्थिक जिम्मेदारी उठाए बिना सुरक्षित वातावरण में रहने का अवसर मिल सकता है।
सिर्फ किराए के मकान नहीं, सुविधाओं पर भी जोर
प्रस्तावित 'रेंटल हाउसिंग मॉडल' में केवल मकान उपलब्ध कराने के बजाय एज-फ्रेंडली सुविधाओं को भी शामिल किए जाने की उम्मीद है। इसमें बुजुर्गों की उम्र और शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मकानों और आसपास के परिसर को तैयार किया जा सकता है। ऐसे आवासों में बाधारहित प्रवेश और आवागमन, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है।
प्रमुख शहरों से शुरू हो सकता है मॉडल
अधिकारियों के मुताबिक, नीति तैयार होने के बाद UP के प्रमुख शहरों में इसे लागू करने की दिशा में आगे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके बाद शहरी स्थानीय निकायों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश के तेजी से शहरीकरण और बदलती पारिवारिक संरचना के बीच वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग आवास व्यवस्था की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में यूपी सरकार की यह पहल भविष्य में बुजुर्गों के लिए किफायती, सुरक्षित और सुविधाजनक किराये के आवास का एक नया मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि समिति अपनी जांच और स्टडी के बाद सरकार को सिफारिशें देगी। इसके आधार पर बुजुर्गों के लिए प्रस्तावित किराये की आवास नीति का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि यह नीति चुनाव की घोषणा से पहले लागू कर दी जाएगी।