Water bottle: अक्सर जब हम घर के बाहर होते हैं तो प्यास लगने पर दुकान से बोतलबंद पानी खरीद लेते हैं। पिछले करीब 20-30 सालों से भारत में बोतलबंद पानी की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है। लोग समझते हैं कि यह पानी शुद्ध होता है। भारत में बोतलबंद पानी का बड़ा मार्केट है। देश में मिनिरल वॉटर सबसे अधिक बिकने वाला पानी है। इसमें बड़ी मात्रा में मिनिरल गैसें घुली होती हैं। ये रेगुलर पानी से अलग होता है। इसकी वजह ये है कि इसमें कैल्शियम, कार्बोनेट, मैग्नीशियम, सल्फेट जैसे कई तत्व अधिक होते हैं। बोतलबंद पानी में अलग-अलग रंग के ढक्कर लगे होते हैं। क्या आप समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है?
वैसे भी भारत में पानी का बहुत बड़ा कारोबार है। भारत में बोतलबंद पानी के बिजनेस में सबसे बड़ी कंपनी बिसलेरी है। जिसके वॉटर बॉटल एयरपोर्ट से लेकर कस्बों के जनरल स्टोर पर तक बिकते हुए नजर आते हैं। भारत में बोतलबंद पानी के मार्केट में और भी कई कंपनियां हैं।
भारत में बोतलबंद पानी का बाजार
भारत में बोतलबंद पानी का मार्केट साल 2021 में करीब 20,000 करोड़ रुपये का था। इसमें बिसलेरी की हिस्सेदारी करीब 4000 से 5000 करोड़ रुपये के आसपास है। बिसलेरी के पास संगठित बाजार का 32 फीसदी हिस्सेदारी है। किनले और एक्वाफिना जैसे ब्रॉन्ड इससे पीछे हैं। जल प्रदूषण और इसे बढ़ती स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं ने भारत में मिनिरल वॉटर के कारोबार के साइज में इजाफा कर दिया है। इसकी वजह से बोतलबंद पानी की खपत बढ़ी है। भारत में मिनिरल वाटर चार अलग-अलग साइज में मिलते हैं। एक लीटर की बोतल, दो लीटर की बोतल, 500 मिलीलीटर की बोतल और 250 मिलीलीटर की बोतल। वहीं कई बोतलों का ढक्कन अलग-अलग रंग का होता है।
जानिए अलग-अलग रंग के ढक्कन का क्या है मतलब
इसका मतलब है कि बोतल का पानी प्रोसेस्ड है।
इसका मतलब है कि पानी एल्कलाइन है।
इसका मतलब है कि पानी को झरने से जमा किया गया है।
इसका मतलब है कि पानी में फ्लेवर मिलाया गया है।