आजकल युवा प्रोफेशनल क्रेडिट कार्ड को सिर्फ शॉपिंग तक सीमित नहीं रखते। कई बैंक EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम तक कार्ड से चुकाने की सुविधा देते हैं, जो पहले 50 दिनों का फायदा और रिवॉर्ड पॉइंट्स देता नजर आता है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह उधार लेकर निवेश का जाल है, जहां एक चूक पूरी प्लानिंग उजाड़ सकती है।
आकर्षण क्यों, लेकिन खतरे साफ?
क्रेडिट कार्ड पर EMI या SIP लगाने से कैश फ्लो मैनेज लगता है। रिवॉल्विंग क्रेडिट 36-48% सालाना ब्याज वसूलता है, जो किसी लोन या SIP रिटर्न से कहीं ऊपर है। अगर बिल समय पर न चुकाया तो चक्रवृद्धि ब्याज बम फटता है। बाजार गिरे तो SIP घाटे में, लेकिन कार्ड ब्याज चढ़ता रहेगा। क्रेडिट स्कोर को ECS डिफॉल्ट से ज्यादा नुकसान पहुंचाता है, क्योंकि इसे व्यवहारिक लापरवाही माना जाता है। SEBI नियम SIP के लिए कार्ड स्वीकार नहीं करते, ताकि उधार का निवेश रोका जाए।
कार्ड लिमिट से खरीदारी का भ्रम पैदा होता है, ट्रैकिंग मुश्किल। बचत अनुशासन टूटता है, उधार पर निवेश की आदत पड़ जाती है। अनपेक्षित आय विलंब से चेन रिएक्शन शुरू एक मिस्ड पेमेंट से स्कोर गिरता है।
- डेबिट कार्ड EMI: SBI, HDFC जैसे बैंक बैलेंस चेक कर देते हैं, ब्याज कम या जीरो।
- कंज्यूमर लोन: Tata Capital, Bajaj Finserv से गैजेट्स पर कम कागजी।
- BNPL ऐप्स: LazyPay, Simpl से छोटे खरीद पर जीरो ब्याज EMI।
- बैंक मैंडेट: SIP/EMI सीधे अकाउंट से, कोई छिपा रिस्क नहीं।
क्रेडिट कार्ड छोटे प्लान्ड खर्च, ट्रैवल के लिए ठीक, लेकिन लॉन्ग-टर्म कमिटमेंट के लिए नहीं। सरप्लस से बचत बढ़ाएं, उधार से दूर रहें वित्तीय स्थिरता यहीं है।