Crude Oil Investments: कच्चे तेल में कैसे लगाएं पैसा? युद्ध के बीच आसमान पर भाव, जानिए निवेश के विकल्प

Crude Oil Investments: ईरान युद्ध के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। ऐसे माहौल में कई निवेशक क्रूड ऑयल में निवेश के विकल्प तलाश रहे हैं। जानिए कच्चे तेल में निवेश के क्या विकल्प हैं और आप उनमें कैसे पैसा लगा सकते हैं।

अपडेटेड Mar 11, 2026 पर 11:12 PM
Story continues below Advertisement
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमत करीब 66.65 डॉलर से बढ़कर 83.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

Crude Oil Investments: कच्चा तेल दुनिया की सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली कमोडिटी में से एक है। इसकी कीमतों में बदलाव अक्सर वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू राजनीतिक घटनाओं का असर दिखाते हैं। आज दुनिया में हर दिन 100 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल की खपत होती है। इससे साफ है कि परिवहन, उद्योग और ऊर्जा सप्लाई में कच्चे तेल की भूमिका कितनी अहम है।

हालांकि फाइनेंशियल मार्केट में तेल की ट्रेडिंग वास्तविक मांग से कई गुना ज्यादा होती है। उदाहरण के लिए WTI क्रूड फ्यूचर्स में ही रोजाना लगभग 1.2 से 2 बिलियन बैरल तक का ट्रेड कागज पर होता है।

तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव क्यों?


तेल की ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत ज्यादा होने की वजह से सप्लाई, उत्पादन या मांग में थोड़ा सा बदलाव भी कीमतों में बड़ा उतार चढ़ाव ला सकता है। यही कारण है कि कई निवेशक तेल को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करते हैं। इसका मकसद पोर्टफोलियो में विविधता लाना या कीमतों की चाल से फायदा उठाना होता है।

हाल के दिनों में ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। इसके कारण तेल बाजार में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है।

युद्ध के बाद कैसे बढ़ी तेल की कीमत

पिछले एक साल में WTI क्रूड ने अच्छी तेजी दिखाई है। 12 मार्च 2025 को इसकी कीमत 67.04 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 11 मार्च 2026 तक बढ़कर करीब 83.40 डॉलर प्रति बैरल हो गई। यानी करीब 24.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

हालांकि इस साल का अधिकांश उछाल हाल के दिनों में ही आया है। पूरे साल कीमतें लगभग 55 से 70 डॉलर के दायरे में घूमती रहीं। लेकिन मार्च की शुरुआत में अचानक तेजी देखने को मिली।

28 फरवरी 2026 को ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद तेल की कीमत करीब 66.65 डॉलर से बढ़कर 83.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यानी लगभग 25 प्रतिशत की तेजी। इससे साफ है कि भू राजनीतिक तनाव तेल की कीमतों को तेजी से ऊपर ले जा सकता है।

कच्चे तेल में निवेश के विकल्प

जो निवेशक कच्चे तेल में निवेश करना चाहते हैं, उनके पास कई विकल्प होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक कितना जोखिम लेना चाहते हैं, उनकी निवेश अवधि क्या है और बाजार की समझ कितनी है।

इन विकल्पों में ऑयल ETF, ऊर्जा कंपनियों के शेयर और कमोडिटी एक्सचेंज पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग शामिल हैं।

ऑयल ETF में कैसे करें निवेश

ऑयल एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ETF कच्चे तेल में निवेश का आसान तरीका बनते जा रहे हैं। ये फंड तेल की कीमतों या उससे जुड़े इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। इनके जरिए निवेशक सीधे फ्यूचर्स ट्रेड किए बिना भी तेल बाजार में निवेश कर सकते हैं। कई ETF WTI या Brent क्रूड को ट्रैक करते हैं।

Arunasset Investment Services के को-फाउंडर अंकित पटेल के मुताबिक निवेशक चाहें तो अमेरिका में लिस्टेड ETF जैसे United States Oil Fund (USO) में निवेश करने के लिए ग्लोबल अकाउंट खोल सकते हैं।

हालांकि उन्होंने बताया कि इस तरह के निवेश पर लॉन्ग टर्म टैक्स का फायदा पाने के लिए कम से कम 2 साल तक निवेश बनाए रखना जरूरी होता है। अगर इससे पहले निवेश बेच दिया जाए तो टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना पड़ता है। पटेल ने यह भी कहा कि अगर कोई निवेशक एक साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा पैसा विदेश भेजता है, तो बैंक 20 प्रतिशत TCS (Tax Collected at Source) काटता है।

पटेल के अनुसार निवेशक भारतीय एनर्जी ETF में भी निवेश कर सकते हैं, जिनमें ONGC जैसी कंपनियों के शेयर शामिल होते हैं। इन पर भारतीय इक्विटी टैक्स नियम लागू होते हैं।

ऊर्जा कंपनियों के शेयर

निवेशक उन कंपनियों के शेयर भी खरीद सकते हैं जो तेल की खोज, उत्पादन और रिफाइनिंग का काम करती हैं। Stockify के फाउंडर और CEO पियूष झुनझुनवाला के मुताबिक जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो ExxonMobil, Chevron और BP जैसी बड़ी ऊर्जा कंपनियों को इसका फायदा मिलता है। ऐसे में इन कंपनियों के शेयरों में निवेश करके भी तेल की कीमतों में तेजी का लाभ लिया जा सकता है।

MCX पर कच्चे तेल में ट्रेडिंग

भारत में निवेशक Multi Commodity Exchange (MCX) के जरिए कच्चे तेल के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड कर सकते हैं। इसमें निवेशक भविष्य की कीमतों का अनुमान लगाकर पोजिशन लेते हैं। यह तरीका आमतौर पर अनुभवी ट्रेडर्स के बीच ज्यादा लोकप्रिय है क्योंकि इसमें मार्जिन और लीवरेज का इस्तेमाल होता है।

अंकित पटेल के मुताबिक MCX पर ट्रेडिंग में होने वाला मुनाफा बिजनेस इनकम माना जाता है। इसलिए निवेश अवधि चाहे जितनी भी हो, उस पर टैक्स निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार देना पड़ता है।

Oil Prices: हर रोज 15 मिलियन बैरल कच्चे तेल की तंगी? एक्सपर्ट्स बोले- $200 तक जा सकता है भाव

निवेश से पहले किन बातों का ध्यान रखें

एक्सपर्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल में निवेश करने से पहले कई वैश्विक कारकों का आकलन जरूरी है। इनमें वैश्विक मांग और सप्लाई, भू राजनीतिक तनाव, OPEC के फैसले और मुद्रा विनिमय दर जैसे कारक शामिल हैं।

पियूष झुनझुनवाला का कहना है कि तेल सेक्टर में निवेश करते समय लंबी अवधि की रणनीति और विविध निवेश पोर्टफोलियो रखना जरूरी है। क्योंकि इस बाजार में कीमतों में उतार चढ़ाव काफी ज्यादा होता है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।