Oil Prices: हर रोज 15 मिलियन बैरल कच्चे तेल की तंगी? एक्सपर्ट्स बोले- $200 तक जा सकता है भाव
Oil Prices: अंतरराष्ट्रीय एनर्जी रिसर्च और कंसल्टिंग कंपनी Wood Mackenzie की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट से दुनिया को रोज 15 मिलियन बैरल तेल की कमी हो सकती है। अगर हालात नहीं सुधरे तो कच्चा तेल 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। जानिए डिटेल।
Simon Flowers के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थीं।
Oil Prices: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी साफ दिखाई देने लगा है। रिसर्च फर्म Wood Mackenzie की नई रिपोर्ट के मुताबिक- दुनिया को रोजाना करीब 15 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
अगर हालात जल्दी नहीं सुधरे और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्ते बंद रहे, तो एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतें जल्द ही 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
तेल का दाम बढ़ने का खतरा क्यों है?
इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि, फिर कुछ गिरावट के बाद कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं।
Wood Mackenzie के चीफ एनालिस्ट साइमन फ्लॉवर्स (Simon Flowers) के मुताबिक भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन तेल सप्लाई तुरंत सामान्य नहीं हो पाएगी।
उनका कहना है कि बंदरगाहों पर मौजूद तेल का स्टॉक जल्दी बाजार में आ सकता है, लेकिन अगर तेल के कुएं लंबे समय तक बंद रहे तो उन्हें फिर से पूरी क्षमता पर लाने में कई हफ्ते या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है।
यूरोप और एशिया में बढ़ी चिंता
युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका असर खास तौर पर यूरोप और एशिया में दिखाई दे रहा है।
यूरोप आम तौर पर डीजल और जेट फ्यूल के लिए खाड़ी देशों पर काफी निर्भर रहता है। अगर वहां से सप्लाई रुकती है तो यूरोप को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। वहीं चीन और भारत जैसे एशियाई देश अब पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों से तेल खरीदने की कोशिश कर रहे हैं।
मध्य पूर्व के बाहर उपलब्ध सीमित तेल के लिए अब कई देश एक साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसका असर यह हो रहा है कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों पर ऊपर की तरफ दबाव बढ़ रहा है।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कैसे रुकेगी?
कई देशों के पास रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, जो करीब 90 दिनों तक की जरूरत पूरी कर सकते हैं। लेकिन इतनी बड़ी सप्लाई कमी को पूरा करने के लिए यह पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
अगर अमेरिका भी अपने घरेलू तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाने की कोशिश करे, तब भी इससे कुल कमी का केवल छोटा हिस्सा ही पूरा हो पाएगा।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सप्लाई कम रहती है तो बाजार को संतुलित रखने का एक ही तरीका बचता है- तेल की कीमतें इतनी बढ़ जाएं कि मांग अपने आप कम हो जाए।
200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है तेल
Simon Flowers के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थीं। लेकिन मौजूदा संकट उससे कहीं बड़ा और ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
अगर युद्ध लंबा खिंचता है और समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती, तो 2026 में तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
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