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पिता की प्रॉपर्टी में बेटियों का भी बराबर हक, लेकिन इन स्थितियों में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकतीं

2005 से पिता की संपत्ति में बेटों और बेटियों का हक बराबर है। इससे पहले लड़कियों का पिता की प्रॉपर्टी पर दावा नहीं बनता था। लेकिन, सरकार ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में 2005 में संशोधर कर बेटियों को भी पिता की संपत्ति में बराबर का हक दे दिया

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 11, 2025 पर 4:19 PM
पिता की प्रॉपर्टी में बेटियों का भी बराबर हक, लेकिन इन स्थितियों में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकतीं
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन के बाद बेटी का हक न सिर्फ सेल्फ-एक्वायर्ड एसेट्स में है बल्कि एनसेस्टरल प्रॉपर्टी में भी है।

पिता की संपत्ति में अब बेटियों का भी बराबर का हक है। सरकार ने इस बारे में 2005 में कानून में संशोधन किया था। इसके बावजूद इस बारे में लोगों को काफी उलझन है। लड़कियां समाज में आम तौर पर पिता की प्रॉपर्टी में दावा करने से संकोच करती हैं। इससे कानून में संसोधन के बावजूद उन्हें अपना हक नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं इस बारे में क्या कहता है कानून।

2005 में सरकार ने किया था कानून में संशोधन

सरकार ने समाज की बदलती आर्थिक-सामाजिक स्थितियों को देखते हुए 2005 में एक बड़ा कदम उठाया था। तब हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (Hindu Succession Act) में संशोधन किया गया था। यह नियम कहता है कि पिता की संपत्ति पर जितना हक बेटों का है, उतना ही हक बेटियों का है। दूसरा यह है कि बेटी विवाहित हो या अविवाहित उसका पिता की संपत्ति में अपने भाई जितना हक होगा। कानून में इस संशोधन से यह उम्मीद थी कि दशकों से चली आ रही सोच में बदलाव आएगा।

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