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EMI का बोझ कम करने में मददगार है Debt-to-Income Ratio, जानिए कैसे बचाएगा आपका बजट

Debt-to-Income Ratio (DTI) बताता है कि आपकी आय के मुकाबले EMI और कर्ज का बोझ कितना है। सही DTI बनाए रखने से EMI प्रबंधन आसान होता है और वित्तीय संकट से बचाव होता है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Jan 30, 2026 पर 5:00 PM
EMI का बोझ कम करने में मददगार है Debt-to-Income Ratio, जानिए कैसे बचाएगा आपका बजट

आजकल हर किसी के पास किसी न किसी तरह का लोन होता है चाहे वह होम लोन हो, कार लोन या फिर पर्सनल लोन। इन सबकी EMI मिलकर अक्सर मासिक बजट पर भारी पड़ जाती है। ऐसे में Debt-to-Income Ratio (DTI) एक अहम पैमाना है, जो बताता है कि आपकी आय के मुकाबले आपका कर्ज कितना है और क्या आप नई EMI संभाल पाएंगे या नहीं।

Debt-to-Income Ratio क्या है?

DTI का मतलब है आपकी मासिक आय के मुकाबले आपकी कुल EMI और कर्ज का अनुपात। उदाहरण के लिए, अगर आपकी मासिक आय ₹50,000 है और EMI मिलाकर ₹20,000 है, तो आपका DTI 40% होगा। बैंक और वित्तीय संस्थान इसी अनुपात को देखकर तय करते हैं कि आपको नया लोन देना सुरक्षित है या नहीं।

EMI बोझ से बचाव कैसे करता है DTI?

- अगर आपका DTI 30-40% से कम है तो इसे सुरक्षित माना जाता है।

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