Majhi Ladki Bahin Yojana: क्या आपके भी ई-केवाईसी में हुई गड़बड़ी? अब योजना के लाभार्थियों को मिलेगा फिजिकल वेरिफिकेशन का सहारा

Majhi Ladki Bahin Yojana Physical Verification: महाराष्ट्र सरकार ने 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना' की लाभार्थी महिलाओं के लिए बड़ी राहत दी है। ई-केवाईसी प्रक्रिया में गलत विकल्प चुनने से अटकीं महिलाओं का अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए स्थानीय स्तर पर फिजिकल वेरिफिकेशन होगा।

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 6:27 PM
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महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और पोषण सुधार के लिए शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जाती है। लेकिन हाल ही में कई लाभार्थियों को ई-केवाईसी प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियों और गलत विकल्प चुनने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा।

इन समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने घोषणा की है कि जिन महिलाओं की ई-केवाईसी प्रक्रिया में त्रुटियां हुई हैं, उनका फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। इसके लिए जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से स्थानीय स्तर पर लाभार्थियों की जांच करें। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि कोई भी पात्र महिला सिर्फ तकनीकी कारणों से योजना से वंचित न रह जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 तय की गई है। लेकिन जिन महिलाओं को ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाई आई है, उनके लिए यह फिजिकल वेरिफिकेशन राहत की तरह है। यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनकी वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम है और जो अन्य समान योजनाओं का लाभ नहीं ले रहे हैं।

मंत्री तटकरे ने एक्स पर पोस्ट कर सभी कलेक्टरों को तुरंत फिजिकल चेक के आदेश दिए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर जाकर सत्यापन करेंगी, जिससे गलत रिकॉर्ड ठीक होंगे। योजना महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सशक्तिकरण पर फोकस करती है। 2026 में डबल किस्त (3000 रुपये) की चर्चा भी है, लेकिन ई-केवाईसी स्टेटस चेक जरूरी। ladakibahin.maharashtra.gov.in पर लॉगिन कर अपडेट देखें। यह फैसला लाखों महिलाओं को लाभ से वंचित होने से बचाएगा।


इस फैसले ने हजारों महिलाओं को उम्मीद दी है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली कई महिलाएं डिजिटल प्रक्रिया से अनभिज्ञ थीं और ई-केवाईसी के दौरान गलत विकल्प चुन बैठीं। अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से उन्हें व्यक्तिगत रूप से सत्यापित किया जाएगा। इससे न केवल योजना का पारदर्शी क्रियान्वयन होगा बल्कि महिलाओं का भरोसा भी मजबूत होगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है।

कल्पना कीजिए, एक ग्रामीण महिला जो पहली बार बैंक और डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ रही है। ई-केवाईसी में गलती होने पर उसे लगा कि शायद अब वह ₹1,500 की मदद से वंचित रह जाएगी। लेकिन सरकार का यह नया कदम उसके लिए उम्मीद की किरण है। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को यह संदेश भी है कि उनकी आवाज और अधिकारों को महत्व दिया जा रहा है।

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