गोल्ड के निवेशकों के लिए साल 2025 शानदार रहा। जहां शेयर बाजार में साल के ज्यादातर समय कमजोरी बनी रही, वही गोल्ड की कीमतें लगातार नई ऊंचाई पर पहुंचती रहीं। डिजिटल गोल्ड में भी इनवेस्टर्स ने दिलचस्पी दिखाई। एनपीसीआई के डेटा के मुताबिक, इस साल डिजिटल गोल्ड में 94.05 करोड़ ट्रांजेक्शंस हुए हैं। इस साल नवंबर तक इन ट्रांजेक्शंस की कुल वैल्यू 12,471 करोड़ को पार कर गई।
Digital Gold में निवेश करना आसान है। यह फिजिकल गोल्ड खरीदे बगैर आपको गोल्ड में निवेश करने का मौका देता है। इसमें निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने की एक वजह यह है कि इसमें छोटे अमाउंट से निवेश किया जा सकता है। कुछ प्लेटफॉर्म को 10 रुपये के अमाउंट से डिजिटल गोल्ड में निवेश करने की सुविधा देते हैं। इनवेस्टर्स घर बैठे ऑनलाइन डिजिटल गोल्ड खरीद और बेच सकते हैं।
ये प्लेटफॉर्म्स देते हैं सुविधा
इनवेस्टर्स Paytm, PhonePe, Google Pay और Amazon जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। कल्याण ज्वेलर्स, तनिष्क, मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स जैसे ज्वेलर्स भी डिजिटल गोल्ड ऑफर करते हैं। ये प्लेटफॉर्म इनवेस्टर्स की तरफ से फिजिकल गोल्ड खरीदते हैं और उसे सुरक्षित और इनश्योरेंड वॉल्ट में रखते हैं। इनवेस्टर्स अपनी जरूरत के हिसाब से अपने डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड में बदल (Convert) सकता है।
कीमतें ओपन मार्केट में तय नहीं होतीं
आनंदराठी वेल्थ में म्यूचु्अल फंड्स की हेड श्वेता रजनी ने कहा, "एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट्स की तरह डिजिटल गोल्ड की कीमतें ओपन मार्केट में तय नहीं होती है। मार्केट में उतार-चढ़ाव होने पर प्लेटफॉर्म खरीद और बिक्री कीमत के बीच के फर्क को बढ़ा देते हैं या सेल प्राइसेज को एडजस्ट करते हैं। इससे इनवेस्टर्स अगर बेचना चाहे तो उसे बहुत अच्छी कीमत नहीं मिलती है।"
सेबी निवेशकों को कर चुका है सतर्क
सेबी ने इस साल नवंबर में डिजिटल गोल्ड में निवेश करने वाले लोगों को सतर्क किया था। रेगुलेटर ने कहा था कि यह गोल्ड ईटीएफ या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (एसजीबी) की तरह रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स नहीं है। इसलिए इसके इनवेस्टर्स को सेबी की सुरक्षा हासिल नहीं है। रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स नहीं होने की वजह से इसके नियमों में पारदर्शिता का अभाव है। रेगुलेटर के इस स्पष्टीकरण के बाद यह तय हो गया है कि इसमें निवेश में रिस्क है।
निवेश पर कुछ चार्जेज लगते हैं
अगर आप डिजिटल गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं तो आप पेटीएम, फोनपे या गूगल पे के जरिए कर सकते हैं। आपको इन प्लेटफॉर्म पर अपनी किसी सरकारी आईडी और बैंक अकाउंट के साथ रजिस्टर करना पड़ेगा। डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए आपको प्लेटफॉर्म मार्जिन और 3 फीसदी जीएसटी चुकाना होता है। उदाहरण के लिए अगर आप 10,000 रुपये का डिजिटल गोल्ड खरीद रहे हैं तो 300 रुपये जीएसटी के साथ और 300 रुपये एम्बेडेड-स्प्रेड के रूप में खर्च करना पड़ेगा।
फिजिकल गोल्ड में बदलने पर चार्ज लागू होते हैं
डिजिटल गोल्ड बेचने के वक्त प्लेटफॉर्म स्प्रेड (खरीद और बिक्री कीमत का फर्क) लगाता है जो 2-3 फीसदी या इससे ज्यादा हो सकता है। डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड में बदलने पर अतिरिक्त मेकिंग चार्ज, डिलिवरी फीस और जीएसटी लगता है। शुरुआत में इनवेस्टर्स को इन सभी कॉस्ट के बारे में पता नहीं होता है।
शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है
डिजिटल गोल्ड को बेचने पर शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता है। 24 महीनों से पहले बेचने पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस लगता है। गेंस पर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। लॉन्ग टर्म पर 12.5 फीसदी तब टैक्स लगता है जब इसे 24 महीनों के बाद बेचा जाता है।