Digital Gold Investment: डिजिटल गोल्ड खरीद रहे हैं? पहले जान लीजिए फीस, जोखिम और टैक्स का हिसाब

Digital Gold Investment: डिजिटल गोल्ड में निवेश आसान और सस्ता दिखता है, लेकिन इसमें फीस, टैक्स और जोखिम भी जुड़े हैं। खरीदने से पहले इसकी पूरी जानकारी जरूरी है, वरना छोटे निवेश में भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

अपडेटेड Apr 21, 2026 पर 2:54 PM
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डिजिटल गोल्ड अभी पूरी तरह किसी फाइनेंशियल रेगुलेटर जैसे SEBI या RBI के सीधे नियंत्रण में नहीं आता।

सोना भारत में हमेशा से भरोसेमंद निवेश माना जाता है। पहले लोग इसे ज्वेलरी, सिक्के या बिस्कुट के रूप में खरीदते थे। लेकिन अब समय बदल रहा है। फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के आने के बाद निवेशक डिजिटल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। जैसे कि डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड।

डिजिटल गोल्ड खासकर नए निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। क्योंकि यह काफी आसान है और इसमें बहुत छोटी रकम से शुरुआत की जा सकती है। फिजिकल गोल्ड के उलट इसे आप ऑनलाइन खरीद सकते हैं। उतनी ही मात्रा में इश्यूअर की तरफ से असली सोना आपके नाम पर सुरक्षित और इंश्योर्ड वॉल्ट में रखा जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि आप सिर्फ ₹1 से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

अगर आप भी डिजिटल गोल्ड में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो इसके शुल्क, जोखिम और टैक्स को अच्छे से समझ लेना जरूरी है।


डिजिटल गोल्ड के फायदे

एक्सेस और कम रकम से शुरुआत: डिजिटल गोल्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें कोई बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती। आप ₹1 से भी शुरुआत कर सकते हैं। इसलिए यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जो धीरे-धीरे निवेश करना चाहते हैं।

स्टोरेज की चिंता नहीं: इसमें आपको सोना रखने की झंझट नहीं होती। आपका गोल्ड बैंक-ग्रेड सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है और उस पर इंश्योरेंस भी होता है। इससे चोरी या नुकसान का डर नहीं रहता।

आसानी से खरीद-बिक्री: डिजिटल गोल्ड में लिक्विडिटी अच्छी होती है। आप मोबाइल ऐप के जरिए कभी भी बाजार भाव पर इसे खरीद या बेच सकते हैं।

रियल-टाइम जानकारी: ज्यादातर प्लेटफॉर्म आपको गोल्ड की कीमत और आपके निवेश की वैल्यू रियल-टाइम में दिखाते हैं। साथ ही डिजिटल सर्टिफिकेट भी मिलता है, जिससे आपके निवेश का रिकॉर्ड साफ रहता है।

शुद्धता की गारंटी: फिजिकल गोल्ड में अक्सर शुद्धता को लेकर शक रहता है, लेकिन डिजिटल गोल्ड में 24 कैरेट शुद्धता का सर्टिफिकेट मिलता है, जिससे यह चिंता खत्म हो जाती है।

डिजिटल गोल्ड पर लगने वाला टैक्स

डिजिटल गोल्ड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे कितने समय तक रखा है।

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर आप 24-36 महीनों के अंदर इसे बेचते हैं, तो मुनाफा आपकी कुल आय में जुड़ जाता है और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): अगर आप इसे 24-36 महीनों से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो मुनाफे पर करीब 20% टैक्स लगता है। इसमें इंडेक्सेशन का फायदा भी मिलता है, जिससे टैक्स थोड़ा कम हो सकता है।

डिजिटल गोल्ड से जुड़े जोखिम

डिजिटल गोल्ड अभी पूरी तरह किसी फाइनेंशियल रेगुलेटर जैसे SEBI या RBI के सीधे नियंत्रण में नहीं आता। इसलिए यह एक तरह से ग्रे एरिया में आता है। प्लेटफॉर्म यह दावा करते हैं कि आपका सोना सुरक्षित है, लेकिन असल में यह थर्ड पार्टी कस्टोडियन के पास रखा होता है। यानी आपको प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना पड़ता है।

साथ ही, आपका निवेश पूरी तरह उस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर करता है। अगर प्लेटफॉर्म में कोई दिक्कत आती है, तो आपको परेशानी हो सकती है। डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड में बदलते समय 8% से 25% तक चार्ज लग सकता है। इसके अलावा खरीद और बिक्री के बीच कीमत में अंतर (स्प्रेड) भी हो सकता है।

साइबर अटैक, तकनीकी खराबी या प्लेटफॉर्म डाउन होने जैसी समस्याएं कभी-कभी आपके निवेश तक पहुंच को प्रभावित कर सकती हैं।

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