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डिजिटल लॉकर या बैंक लॉकर, आपके दस्तावेजों की सुरक्षा में कौन है बेहतर?

डिजिटल लॉकर और बैंक लॉकर दोनों ही दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए अहम हैं, लेकिन इनकी उपयोगिता अलग-अलग है। डिजिटल लॉकर ऑनलाइन दस्तावेजों को सुरक्षित रखता है, जबकि बैंक लॉकर भौतिक कागजात और कीमती सामान के लिए बेहतर है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों का संयोजन सबसे सुरक्षित विकल्प है

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 05, 2026 पर 4:26 PM
डिजिटल लॉकर या बैंक लॉकर, आपके दस्तावेजों की सुरक्षा में कौन है बेहतर?

आज के समय में दस्तावेजों की सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए बड़ी चिंता का विषय है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, प्रॉपर्टी पेपर्स, इंश्योरेंस पॉलिसी और शैक्षणिक सर्टिफिकेट जैसे अहम कागजात खो जाने या चोरी हो जाने पर बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल लॉकर बेहतर है या बैंक लॉकर।

भारत सरकार का डिजिटल लॉकर (DigiLocker) एक क्लाउड-बेस्ड प्लेटफॉर्म है, जहां नागरिक अपने अहम दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं। इसमें आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस, शैक्षणिक सर्टिफिकेट और इंश्योरेंस पॉलिसी जैसी फाइलें स्टोर की जा सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दस्तावेज कभी खोते नहीं और न ही प्राकृतिक आपदाओं जैसे आग या बाढ़ से प्रभावित होते हैं। साथ ही, इन्हें कहीं भी और कभी भी एक्सेस किया जा सकता है। हालांकि इसमें पासवर्ड भूलने या साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं।

दूसरी ओर, बैंक लॉकर पारंपरिक रूप से लोगों का भरोसेमंद विकल्प रहा है। इसमें ज्वेलरी, नकदी, प्रॉपर्टी पेपर्स और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखा जाता है। बैंक लॉकर की सुरक्षा में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और CCTV निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकें शामिल की जा रही हैं। लेकिन बैंक लॉकर तक पहुंचने के लिए समय और प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। साथ ही, इसका किराया भी हर साल बढ़ता जा रहा है, जो आम लोगों के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों विकल्पों की अपनी-अपनी खूबियां और सीमाएं हैं। डिजिटल लॉकर दस्तावेज़ों की सॉफ्ट कॉपी को सुरक्षित रखने और तुरंत एक्सेस करने के लिए सबसे अच्छा है, जबकि बैंक लॉकर असली कागजात और कीमती सामान को चोरी और नुकसान से बचाने के लिए भरोसेमंद है।

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