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Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल

Direct vs Regular Mutual Fund: दिखने में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के एक्सपेंस रेशियो में महज 0.50% से 1% तक का ही अंतर नजर आता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग यानी ब्याज पर ब्याज के कारण यह मामूली अंतर एक विशाल रकम में बदल जाता है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Jul 15, 2026 पर 3:05 PM
Direct vs Regular: एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम, फिर भी एक को मिला ₹50 लाख ज्यादा रिटर्न! समझें एक्सपेंस रेशियो का असली खेल
जेरोधा के नितिन कामथ ने म्यूचूअल फंड में निवेश को लेकर एक बड़ी सीक्रेट बात बताई है

Direct vs Regular Mutual Funds Comparison: म्युचुअल फंड में निवेश करने वाले हर निवेशक के सामने दो विकल्प होते हैं- डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान। हाल ही में ऑनलाइन ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ग्रो द्वारा रेगुलर म्यूचुअल फंड सेगमेंट में 'MF Prime' सर्विस लॉन्च करने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है। यह नई सर्विस उन निवेशकों के लिए है जो अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने और सही फंड चुनने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह चाहते हैं।

वहीं, जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ का कहना है कि खुद से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए डायरेक्ट प्लान एक 'नो-ब्रेनर' यानी सबसे आसान और समझदारी भरा विकल्प है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन नहीं देना पड़ता। उन्होंने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म 'कॉइन' पर निवेशकों ने कमीशन न देकर अब तक हजारों करोड़ रुपये बचाए हैं। आइए समझते हैं कि डायरेक्ट और रेगुलर फंड्स में क्या अंतर है और कैसे डायरेक्ट प्लान आपके पोर्टफोलियो में ₹50 लाख तक एक्स्ट्रा जोड़ सकता है।

डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर है?

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