Diwali 2022: दिवाली पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। कुछ लोग सोने की ज्वेलरी (Gold Jewelry) खरीदते हैं तो कुछ लोग इनवेस्टमेंट (Investment) के लिए सोने में निवेश करते हैं। कुछ साल पहले तक ज्वेलरी सोने में निवेश का एकमात्र विकल्प था। लेकिन, पिछले कुछ सालों में सोने में निवेश के हमारे लिए कई विकल्प उपलब्ध हो गए हैं। फाइनेंशियल मार्केट के विस्तार और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशंस से गोल्ड में निवेश करना बहुत आसान हो गया है।
इस बार आपके लिए सोने में निवेश के सही ऑप्शन को सेलेक्ट करना बहुत जरूरी है। आइए सोने में निवेश के अलग-अलग विकल्प के बारे में जानते हैं।
गोल्ड ज्वेलरी में निवेश के पारंपरिक रूप से दो मकसद रहे हैं। पहला ज्वेलरी पहनने के काम में आ जाता है। दूसरा, सोने की कीमतें बढ़ने के साथ ही ज्वेलरी की कीमतें भी बढ़ती हैं। मुश्किल वक्त में यह हमारी मदद भी करता है। लोग ज्वेलरी को साहूकार के पास रख कर्ज लेते थे। लेकिन, अब वक्त बदल गया है। कर्ज के लिए साहूकार पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं रह गई है। ज्वेलरी खरीदने में आपको कई तरह के चार्ज भी चुकाने पड़ते हैं। इससे सोने में निवेश पर मिलने वाल रिटर्न कम हो जाता है। करीब 10-15 फीसदी मेकिंग चार्ज देना पड़ता है। फिर, ज्वैलरी की वैल्यू पर 3 फीसदी जीएसटी लगता है। खरीदारी के वक्त ही ऐसे चार्जेज पर आपका करीब 18 फीसदी पैसा खर्च हो जाता है।
जब आप गोल्ड ज्वेलरी बेचने जाते हैं तो आम तौर पर आपको खरीद कीमत से 5-8 फीसदी कम कीमत ऑफर की जाती है। इससे आपके निवेश की वैल्यू और कम हो जाती है। बार और कॉइन में मेकिंग चार्ज कम होता है, फिर भी आपको 5-6 फीसदी का लॉस उठाना पड़ता है। इसलिए खरीद और बिक्री मूल्य के बीच अंतर की वजह से गोल्ड ज्वेलरी में निवेश का आकर्षण घट जाता है।
पिछले सालों में फिनटेक कंपनियों ने डिजिटल गोल्ड लॉन्च किए हैं, जिसमें निवेश करना फिजिकल गोल्ड खरीदने के मुकाबले बहुत आसान है। ग्राहक ऑनलाइन गोल्ड खरीदता है और यह गोल्ड सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के वॉल्ट में स्टोर हो जाता है। एक और खासियत यह है कि आप हफ्ते के सातों दिन किसी वक्त गोल्ड खरीद सकते हैं। दूसरी खासियत यह है कि आप 100 रुपये मूल्य का गोल्ड भी खरीद सकते हैं।
हालांकि, ये फायदें आकर्षक हैं, लेकिन आपको इनके लिए कुछ कीमत चुकानी पड़ती है। इसमें गोल्ड का प्राइस मार्केट प्राइस के मुकाबले 2 से 4 फीसदी ज्यादा होता है। दूसरी मुश्किल यह है कि डिजिटल गोल्ड रेगुलेटेड नहीं है। ऐसे में हमारा ध्यान सॉवरेन गोल्टड बॉन्ड पर जाता है। इसकी बिक्री आरबीआई साल 2015 से कर रहा है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सरकार की गारंटी के साथ आते हैं। इसका आठ साल मैच्योरिटी पीरियड होता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर इसे पांच साल के बाद भुनाया जा सकता है। हर सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक ग्राम सोने के मूल्य के बराबर होता है। इन बॉन्ड पर आपको सालाना 2.5 फीसदी रिटर्न मैच्योरिटी तक मिलता है। मैच्योरिटी पर कैपिटल गैंस पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता है। इसके साथ एकमात्र कमी यह है कि अगर निवेशक इसे पांच साल से पहले बेचना चाहे तो उसके पास सिर्फ एक्सचेंज के जरिए बेचने का ऑप्शन होगा। लेकिन, लिक्विडिटी कम होने की वजह से इसमें डिस्काउंट पर ट्रेडिंग होती है।
अब हम गोल्ड ईटीएफ पर विचार करते हैं। गोल्ड ईटीएफ की हर यूनिट के पीछ 24 कैरेट गोल्ड होता है। इसे सेक्योर वॉल्ट में रखा जाता है। इसका कम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस भी होता है। ईटीएफ की कीमत सोने की कीमत से जुड़ी होती है। इसलिए सोने की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर गोल्ड ईटीएफ की यूनिट पर भी पड़ता है। इसमें एक्सपेंस रेशियो 1 फीसदी से भी कम है। इस वजह से गोल्ड ईटीएफ सोने में निवेश का बहुत अच्छा माध्यम है। इस दिवाली अगर आप सोने में निवेश का प्लान बना रहे हैं तो आप गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स खरीद सकते हैं।