आज पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है गोल्ड में निवेश करना, जानिए इसकी वजह

ऐतिहासिक रूप से गोल्ड इंडिया में निवेश का पसंदीदा एसेट रहा है। पिछले 20 साल में इसका औसत सालाना रिटर्न 13.8 फीसदी है। यह इस दौरान BSE Sensex के 14.1 फीसदी रिटर्न से थोड़ा ही कम है। लेकिन गोल्ड में निवेश की तुलना शेयरों में निवेश से नहीं की जा सकती, क्योंकि इसमें निवेश का मकसद दूसरा होता है

अपडेटेड Oct 28, 2024 पर 3:24 PM
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केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन से हेजिंग के अलावा इसलिए गोल्ड में निवेश करते हैं, क्योंकि इसमें किसी तरह का डिफॉल्ट रिस्क नहीं होता है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने सितंबर में इंटरेस्ट रेट घटाया था। इसके बाद डॉलर में कमजोरी दिखी है। चूंकि दुनिया में गोल्ड की कीमत डॉलर में तय होती है, इससे डॉलर में कमजोरी से दूसरी करेंसी में गोल्ड खरीदना सस्ता हो जाता है। इससे गोल्ड की मांग बढ़ती है। इस साल अमेरिका में इंटरेस्ट रेट घटने की उम्मीद में डॉलर में गोल्ड 32 फीसदी चढ़ा है, जबकि रुपये में इसमें 19.8 फीसदी तेजी आई है। सवाल है कि क्या यह गोल्ड में निवेश का सही समय है?

पिछले 20 साल में 13 फीसदी से ज्यादा सालाना औसत रिटर्न

ऐतिहासिक रूप से गोल्ड (Gold) इंडिया में निवेश का पसंदीदा एसेट रहा है। पिछले 20 साल में इसका औसत सालाना रिटर्न 13.8 फीसदी है। यह इस दौरान BSE Sensex के 14.1 फीसदी रिटर्न से थोड़ा ही कम है। आम तौर पर गोल्ड और स्टॉक मार्केट में विपरीत संबंध होता है। ऐसे में स्टॉक मार्केट क्रैश होने पर गोल्ड की डिमांड बढ़ जाती है। गोल्ड में निवेश की कई वजहें हैं।


आर्थिक संकट के वक्त भी गोल्ड की वैल्यू बनी रहती है

पहला, इसे निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है। आर्थिक संकट आने पर भी गोल्ड की वैल्यू पर असर नहीं पड़ता है। गोल्ड एक ऐसा एसेट है जिस्की स्वीकार्यता दुनियाभर में है। गोल्ड इनफ्लेशन से भी आपके पैसे की वैल्यू घटने से बचाने में मदद करता है। इसकी कीमतों में शेयरों या दूसरी सिक्योरिटी के मुकाबले कम उतारचढ़ाव देखने को मिलता है। इससे यह निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया बना जाता है। अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर आप गोल्ड को बेच सकते हैं।

गोल्ड और स्टॉक मार्केट में विपरीत संबंध

ऐतिहासिक रूप से देखें तो अमेरिका में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने पर शेयर मार्केट में गिरावट देखने को मिलती है। 2001 में डॉट कॉम बुलबुला फटने पर ऐसा देखा गया था। 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के वक्त भी ऐसा हुआ था। दरअसल, पोर्टफोलियो में गोल्ड होने से शेयर बाजार में गिरावट आने पर वह पोर्टफोलियो की वैल्यू घटने से बचाता है।

कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने गोल्ड में निवेश बढ़ाया है

कई देशों के केंद्रीय बैंकों के गोल्ड खरीदने से भी इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिली है। इस साल जनवरी से मार्च के दौरान केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की कुल डिमांड 483 टन रही। यह 2000 के बाद किसी साल की पहली छमाही में गोल्ड की सबसे ज्यादा डिमांड है। यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के डेटा पर आधारित है। चीन के केंद्रीय बैंक पीपल्स ऑफ चाइना के कुल रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी 5 फीसदी है। यह हिस्सेदारी 1996 के बाद सबसे ज्यादा है। RBI के कुल रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी 10 फीसदी है। आरबीआई के पास 841 टन सोना है।

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गोल्ड में डिफॉल्ट का कोई रिस्क नहीं

केंद्रीय बैंक इनफ्लेशन से हेजिंग के अलावा इसलिए गोल्ड में निवेश करते हैं, क्योंकि इसमें किसी तरह का डिफॉल्ट रिस्क नहीं होता है। इसके अलावा जियोपॉलिटिकल डायवर्सिफिकेशन और किसी संकट के समय गोल्ड के प्रदर्शन की वजह से भी वे इसमें निवेश करते हैं। इसलिए आप चाहें अपने पैसे की सुरक्षा के लिए या पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए गोल्ड में निवेश कर सकते हैं। किसी इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में 5-10 फीसदी गोल्ड जरूर है। जो इनवेस्टर्स रिस्क नहीं लेना चाहते वे गोल्ड में 20 फीसदी तक निवेश कर सकते है। ऐसे वक्त जब जियोपॉलिटिकल टेंशन काफी ज्यादा है और घरेलू स्टॉक मार्केट की वैल्यूएशन ज्यादा दिख रही है, गोल्ड को इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।

शशांक पाल

(लेखक पीएल वेल्थ मैनेजमेंट में चीफ बिजनेस अफसर हैं। यहां व्यक्त विचार उनके निजी विचार हैं। इसका इस पब्लिकेशन से कोई संबंध नहीं है।)

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