Labour Law April Salary: ज्यादातर कर्मचारियों की सैलरी अप्रैल में मार्च की तुलना में पहले से कम आने वाली है। 1 अप्रैल 2026 से सरकार लेबर कानूनों से जुड़े कुछ नियम लागू कर चुकी है। ये बदलाव देश के लाखों कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बदल चुके हैं। अभी ज्यादातर कर्मचारियों कि सैलरी में बेसिक पे की हिस्सेदारी 20 से 30 फीसदी है, जो अब 50 फीसदी करना अनिवार्य है। ऐसा होने पर प्रॉविडेंट फंड के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा क्योंकि ये बेसिक पे के आधार पर कैलकुलेट होता है। ऐसे में कर्मचारियों की हाथ आने वाली सैलरी मार्च की तुलना में अप्रैल में कम होगी।
कुल सैलरी का 50% होगा बेसिक पे
सरकार के लागू किए गए Code on Wages 2019 और Code on Social Security 2020 के तहत सैलरी की परिभाषा को बदला गया है। नए नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic Pay) और महंगाई भत्ता (DA) को मिलाकर कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50 प्रतिशत होना अनिवार्य कर दिया गया है।
पुराने सैलरी में कंपनियां बेसिक सैलरी को काफी कम रखती थीं, जो कई मामलों में कुल वेतन का केवल 20 से 30 प्रतिशत तक होती थी। बाकी अमाउंट को HRA, स्पेशल अलाउंस, LTC और अन्य भत्तों के रूप में दिया जाता था। इससे कर्मचारियों को हर महीने ज्यादा इन-हैंड सैलरी मिलती थी, क्योंकि प्रॉविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी जैसी कटौतियां बेसिक सैलरी पर आधारित होती हैं।
नए नियम लागू होने के बाद कंपनियों को बेसिक सैलरी को कम से कम 50 प्रतिशत तक बढ़ाना पड़ा है। इसका सीधा असर कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के PF योगदान पर पड़ा है, क्योंकि PF का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी के 12 प्रतिशत के हिसाब से होती है।
कितनी कम होगी सैलरी - कैलकुलेशन
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की कुल मंथली सैलरी 1 लाख रुपये है। पहले उसकी बेसिक सैलरी 30,000 रुपये थी, तो PF कटौती 3,600 रुपये होती थी। अब बेसिक सैलरी बढ़कर 50,000 रुपये होने पर PF कटौती 6,000 रुपये हो जाएगी। इस तरह कर्मचारी के हाथ में हर महीने कम अमाउंट आ रही है।
बेसिक सैलरी बढ़ने से PF में योगदान भी बढ़ गया है। यह एक्स्ट्रा अमाउंट सीधे कर्मचारी के अकाउंट में आने के बजाय PF खाते में जमा होगा। यही कारण है कि कर्मचारियों को इस महीने से कम इन-हैंड सैलरी मिलेगी। हालांकि यह पैसा खत्म नहीं होता, बल्कि कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड का हिस्सा बनता है। इसमें नियोक्ता का योगदान भी शामिल होता है, जिससे कुल सेविंग पहले से ज्यादा बढ़ेगी। ये पैसा कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर मिलेगा।