EPF vs NPS : रिटायरमेंट के लिए ईपीएफ और एनपीएस में से कौन है बेस्ट?

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग EPF के दायरे में आते हैं। एंप्लॉयी की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। उतना ही पैसा एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में हर महीने कंट्रिब्यूट करता है

अपडेटेड Dec 11, 2025 पर 3:54 PM
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कम उम्र में एनपीएस में निवेश शुरू करने पर रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

रिटायरमेंट प्लानिंग जल्द शुरू करने के कई फायदे हैं। निवेश के लिए ज्यादा समय मिलने से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। आप जितने लंबे समय तक इनवेस्ट करेंगे आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार होगा। सवाल है कि रिटायरमेंट के लिए एंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ) और नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में से किसमें ज्यादा फायदा है?

प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोग EPF के दायरे में आते हैं। एंप्लॉयी की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने उसके ईपीएफ अकाउंट में जमा होता है। उतना ही पैसा एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में हर महीने कंट्रिब्यूट करता है। ईपीएफ में जमा पैसे पर सालाना इंटरेस्ट मिलता है, जो सरकार तय करती है। ईपीएफ में निवेश पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके रिटर्न पर शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता है।


लंबा सर्विस पीरियड होने पर तैयार होता है बड़ा फंड

ईपीएफ का पैसा धीर-धीरे बढ़ता है। ईपीएफ में आप जितने ज्यादा साल के लिए कंट्रिब्यूट करते हैं, आपके लिए उतना बड़ा फंड तैयार होता है। अगर एंप्लॉयी करियर में ब्रेक लेता है या ईपीएफ से पैसे निकाल लेता है तो फिर रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार नहीं हो पाता है।

एनपीएस का रिटर्न मार्केट से लिंक्ड होता है

एनपीएस अलग तरह से काम करता है। आपके कंट्रिब्यूशन का एक हिस्सा शेयरों में निवेश होता है, जिससे डेट प्रोडक्ट के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलता है। 15-25 साल में इक्विटी में सामान्य ऐलोकेशन से भी बड़ा फंड तैयार हो जाता है। कम उम्र में एनपीएस में निवेश शुरू करने पर रिटायरमेंट तक बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

सब्सक्राइबर्स को निवेश का विकल्प सेलेक्ट करने की सुविधा

एनपीएस सब्सक्राइबर को एक्टिव और ऑटो ऐलोकेशन में से किसी एक विकल्प को सेलेक्ट करने की सुविधा देता है। फंड के प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं होने पर सब्सक्राइबर अपना फंड मैनेजर बदल सकता है। ईपीएफ और एनपीएस में एक बड़ा फर्क यह है कि इसका रिटर्न मार्केट से लिंक्ड होता है। कई बार मार्केट में गिरावट आने पर शॉर्ट टर्म में एनपीएस का रिटर्न घट जाता है।

कम उम्र में निवेश शुरू करने के लिए एनपीएस अच्छा विकल्प

अगर आपकी उम्र 20 प्लस या 30 प्लस है तो एनपीएस आपके लिए ज्यादा फायदेमंद रहेगा। निवेश की अवधि लंबी होने से उस पर मार्केट के उतार-चढ़ाव का कम असर पड़ेगा। कंपाउंडिंड का भी ज्यादा फायदा मिलेगा। अगर उम्र 40 प्लस है तो फिर फैसला लेना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। कई लोग यह सोचते हैं कि सिर्फ ईपीएफ से रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड तैयार हो सकता है।

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एनपीएस और ईपीएफ दोनों में निवेश से ज्यादा फायदा

अगर उम्र 50 साल या इससे ज्यादा है तो फिर स्टैबिलिटी ज्यादा जरूरी हो जाती है। ऐसे में ईपीएफ में निवेश ज्यादा सुरक्षा देता है, जबकि एनपीएस में इक्विटी में ऐलोकेशन कम हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यहां दोनो में निवेश से बहुत अच्छा रिजल्ट मिलता है। ईपीएफ जहां सेफ्टी प्रदान करता है और एनपीएस आपको निवेश पर अच्छा ग्रोथ देता है। अगर दोनों में एक साथ निवेश किया जाए तो रिटायरमेंट के लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

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