PF कटने के नियम बदले! वित्त मंत्रालय ने ₹25,000 की वेज सीलिंग को दी मंजूरी, जानिए आपकी सैलरी पर कितना पड़ेगा असर

EPF Wage Ceiling Increase: 'वेज सीलिंग' का मतलब सरकारी या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वेतन की वह अधिकतम सीमा है, जिसके आधार पर आपकी कटौती तय होती है। अब तक नियम था कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + डीए ₹15,000 प्रति माह तक है, तो उसके लिए ईपीएफ और पेंशन स्कीम में योगदान देना अनिवार्य था

अपडेटेड Aug 03, 2026 पर 4:01 PM
ईपीएफ में अधिक कटौती होने से कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है

EPF Wage Ceiling Increased: संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। वित्त मंत्रालय ने एंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड (EPF) और एंप्लाइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत अनिवार्य योगदान के लिए वेज सीलिंग को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

एक दशक से भी अधिक समय के बाद इस सीमा में संशोधन किया जा रहा है। इस कदम से निजी क्षेत्र के लाखों नए कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस फैसले से आपकी टेक-होम सैलरी, पेंशन और कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।

₹30,000 का था प्रस्ताव, ₹25,000 पर लगी मुहर


सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले वेज सीलिंग को बढ़ाकर ₹30,000 करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ गहन समीक्षा के बाद इसे ₹25,000 प्रति माह (बेसिक पे + डीए) पर फाइनल किया गया है।वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा।

कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद कंपनियों को अपने पेरोल सिस्टम और कंप्लायंस में बदलाव के लिए समय दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो सकता है।

आपके लिए क्या बदलेगा?

₹15,000 से ₹25,000 बेसिक पे वाले दायरे में आएंगे: वर्तमान नियमों के अनुसार, ₹15,000 तक की बेसिक पे वाले कर्मचारियों के लिए ही ईपीएफओ में योगदान देना अनिवार्य था। इससे अधिक बेसिक पे वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ से बाहर रहने का विकल्प था।

लाखों कर्मचारियों को पेंशन सुरक्षा: नया नियम लागू होते ही ₹15,001 से ₹25,000 तक बेसिक पे पाने वाले सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से ईपीएफ और पेंशन स्कीम (EPS) से जुड़ जाएंगे।

टेक-होम सैलरी में बदलाव: ईपीएफ में अधिक कटौती होने से कुछ कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में उनका रिटायरमेंट फंड और पेंशन कॉपर्स काफी बढ़ जाएगा।

क्या होती है 'वेज सीलिंग' और अब इसमें क्या बदलाव होगा?

'वेज सीलिंग' का मतलब सरकारी या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वेतन की वह अधिकतम सीमा है, जिसके आधार पर आपकी कटौती तय होती है। अब तक नियम था कि अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + डीए ₹15,000 प्रति माह तक है, तो उसके लिए ईपीएफ और पेंशन स्कीम में योगदान देना अनिवार्य था। ₹15,000 से अधिक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के पास पीएफ से बाहर रहने या अपनी इच्छा से योगदान देने का विकल्प था।

नए संशोधन के बाद अब ₹15,000 से लेकर ₹25,000 तक की बेसिक सैलरी पाने वाले सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से ईपीएफ और ईपीएस (EPS) पेंशन योजना के दायरे में आ जाएंगे।

कंपनियों और सरकार की जेब पर पड़ेगा असर

वेज सीलिंग बढ़ने से कंपनियों और सरकार दोनों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा:

कंपनियों का पेरोल खर्च बढ़ेगा: नियोक्ताओं को अब अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12% का मैचिंग कंट्रीब्यूशन देना होगा, जिससे कंपनियों का पेरोल कॉस्ट बढ़ जाएगा।

सरकार का पेंशन बजट बढ़ेगा: पेंशन फंड में सरकार भी बेसिक पे का 1.16% योगदान देती है। सीलिंग बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी बढ़ जाएगा। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए EPS के लिए ₹11,144 करोड़ का बजटीय आवंटन किया गया है।

2014 के बाद पहला बड़ा बदलाव

ईपीएफओ की वेज सीलिंग में आखिरी बार संशोधन सितंबर 2014 में किया गया था, जब इसे ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह किया गया था। पिछले 12 सालों में कर्मचारियों के वेतन में हुई बढ़ोतरी को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। यह नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली सभी रजिस्टर्ड कंपनियों पर लागू होगा।

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